अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा, जिसका सीधा असर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा। पहले दिन ओपीडी सेवा ठप रहने के बाद दूसरे दिन इमरजेंसी सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हो गईं। अस्पताल पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालात ऐसे रहे कि कई गंभीर मरीजों को भी समय पर इलाज नहीं मिल सका और उन्हें दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ा।
ओपीडी और इमरजेंसी रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लटका ताला
आंदोलन के दौरान अस्पताल के ओपीडी और इमरजेंसी रजिस्ट्रेशन काउंटर बंद रहे। जूनियर डॉक्टर इमरजेंसी के मुख्य गेट पर धरने पर बैठे रहे और अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे। डॉक्टरों के आंदोलन के कारण अस्पताल की नियमित व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई। जानकारी के अनुसार, दूसरे दिन करीब 50 मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती नहीं किया जा सका। वहीं पिछले दो दिनों में लगभग 3000 मरीज बिना इलाज कराए ही वापस लौट गए।
हॉस्टल की मांग को लेकर आंदोलन पर अड़े जूनियर डॉक्टर
जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में उनके रहने के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधा उपलब्ध नहीं है। उन्हें बाहर किराये के मकानों में रहना पड़ता है, जिससे पढ़ाई और प्रशिक्षण दोनों प्रभावित हो रहे हैं। डॉक्टरों का आरोप है कि वर्ष 2022 से लगातार हॉस्टल निर्माण और आवंटन की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
कॉलेज प्रशासन पर लगाया अनदेखी का आरोप
आंदोलन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने कई बार कॉलेज प्रशासन और प्राचार्य के समक्ष अपनी मांगें रखीं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। मांगों के समाधान में लगातार देरी होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
प्राचार्य कार्यालय में भी जड़ा ताला
जूनियर डॉक्टरों का आक्रोश इतना बढ़ गया कि उन्होंने अस्पताल परिसर के साथ-साथ प्राचार्य कार्यालय में भी ताला जड़ दिया। डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक हॉस्टल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
अस्पताल अधीक्षक ने जताई चिंता
अस्पताल अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार अग्रवाल ने कहा कि जूनियर डॉक्टरों की मांगें कॉलेज प्रशासन से संबंधित हैं, लेकिन इसके कारण मरीजों की चिकित्सा सेवाएं प्रभावित होना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कई गंभीर मरीज इलाज के बिना लौटने को मजबूर हो रहे हैं, जो चिंता का विषय है। प्रशासन की ओर से डॉक्टरों को समझाने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
मरीजों और परिजनों की बढ़ी मुश्किलें
इमरजेंसी और ओपीडी सेवाएं प्रभावित होने से दूर-दराज से इलाज के लिए आए मरीजों और उनके परिजनों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। कई मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजा गया, जबकि कुछ लोग बिना इलाज कराए ही घर लौट गए। फिलहाल अस्पताल प्रशासन और जूनियर डॉक्टरों के बीच बातचीत की उम्मीद बनी हुई है, लेकिन जब तक कोई समाधान नहीं निकलता, तब तक अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहने की आशंका बनी हुई है।