उपेंद्र कुशवाहा (फाइल)
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मोदी जो बात न कह सके, उसे शाह ने कह दिया
काराकाट के डेहरी में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उपेंद्र कुशवाहा के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित किया था। इस सभा में पीएम ने विरोधियों पर खूब जुबानी हमला किया था। लेकिन कुशवाहा को केंद्र में मंत्री बनाने को लेकर किसी तरह का संकेत नहीं दिया था। वहीं, अगले ही दिन गृहमंत्री अमित शाह ने काराकाट लोकसभा क्षेत्र के दाउदनगर की चुनावी सभा में इसका सीधा संकेत दे दिया। वैसे भी भाजपा में पीएम मोदी के बाद भाजपा और केंद्र सरकार में शाह की हैसियत नंबर टू की है। यह भी सर्व विदित है कि पीएम मोदी शाह की बातों को कभी टालते नहीं हैं। शाह की हर बात को वे तरजीह देते हैं। भाजपा में मोदी और शाह की जोड़ी के सामने किसी भी पार्टी नेता को बोलने के पहले बहुत कुछ सोचना पड़ता है। ऐसे में शाह के संकेत से यह तय माना जा रहा है कि अगर उपेंद्र कुशवाहा चुनाव जीतते हैं तो उनके मंत्री बनने की गारंटी ‘मोदी की गारंटी’ वाली है।
कुशवाहा के मंत्री बनने के नाम पर मांगे जा रहे वोट
काराकाट के चुनावी रण में उतरने के साथ ही एनडीए के घटक सभी दलों के स्थानीय नेता चुनाव प्रचार के दौरान जनता के सामने यही बात बार-बार कह रहे हैं कि वोट बर्बाद मत कीजिए। दूसरे को वोट दीजिएगा तो वोट बर्बाद हो जाएगा। उपेंद्र कुशवाहा को वोट देना सार्थक होगा। कुशवाहा जीतेंगे तो मंत्री बनेंगे। दूसरे जीतेंगे तो सिर्फ सांसद बनेंगे, क्योंकि केंद्र में फिर से एनडीए और मोदी की ही सरकार बनने वाली है।
शाह का दांव कितना पड़ेगा भारी, बताएगा चुनाव परिणाम
अब चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा जीतेंगे या कोई और, यह कहना तो फिलहाल मुश्किल है और इसकी सच्चाई का पता तो चुनाव परिणाम से ही चलेगा। इसके बावजूद अमित शाह ने कुशवाहा को मंत्री बनाने का संकेत देकर वोटों के ध्रुवीकरण का एक बहुत बड़ा दांव तो जरूर खेल दिया। यह दांव कितना भारी पड़ता है या नहीं पड़ता है, यह भी चुनाव परिणाम ही बताएगा।