बिहार के मुजफ्फरपुर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद बिहार अग्निशमन विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। संभावित हादसों को रोकने और जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गया जिले में विशेष फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत अस्पतालों, होटलों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में कई संस्थानों में गंभीर खामियां सामने आने के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाया है।
159 संस्थानों की जांच, 42 में मिली गंभीर खामियां
मंगलवार को जिला अग्निशमन पदाधिकारी अमन कुमार सिंह ने बताया कि विशेष अभियान के तहत अब तक जिले के 73 अस्पतालों और 86 होटलों का फायर सेफ्टी ऑडिट किया जा चुका है। जांच के दौरान 42 ऐसे संस्थान चिह्नित किए गए हैं, जहां अग्नि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है। इन संस्थानों में अग्निशमन उपकरणों की कमी, आपातकालीन निकास व्यवस्था की खामियां तथा अन्य सुरक्षा मानकों से जुड़ी कमियां पाई गई हैं। विभाग ने इन्हें सुधार के लिए निर्धारित समय-सीमा दी है।
नोटिस जारी, NOC लेने का सख्त निर्देश
जिला अग्निशमन विभाग ने संबंधित अस्पतालों और होटलों को प्रपत्र-‘स’ के माध्यम से नोटिस जारी किया है। संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे निर्धारित समय के भीतर फायर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करें और सभी आवश्यक सुरक्षा मानकों को लागू करें। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए की जा रही है। सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों को किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी।
अब सिनेमा हॉल, अपार्टमेंट और पेट्रोल पंप की होगी जांच
फायर विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभियान केवल अस्पतालों और होटलों तक सीमित नहीं रहेगा। अगले चरण में जिले के सिनेमा हॉल, बहुमंजिला अपार्टमेंट, पेट्रोल पंप और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों का भी फायर सेफ्टी ऑडिट किया जाएगा। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में लोगों की जान बचाने के लिए सभी सुरक्षा इंतजाम मौजूद हों।
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नियम तोड़े तो सीधे होगी सीलिंग और कानूनी कार्रवाई
जिला अग्निशमन पदाधिकारी अमन कुमार सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर यदि संस्थान अग्नि सुरक्षा मानकों का अनुपालन नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित भवनों को सील करने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि अग्नि सुरक्षा केवल सरकारी नियम नहीं, बल्कि लोगों के जीवन और संपत्ति की रक्षा का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए सभी संस्थानों को इसे गंभीरता से लेना होगा।