करोड़ों रुपये की लागत से बने रबर डैम से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के बाद अब केंद्र सरकार ने गयाजी की जीवनरेखा फल्गु नदी में सालभर जलधारा बहाल करने की नई पहल शुरू की है। केंद्रीय मंत्रियों की बैठक के बाद योजना पर जल्द काम शुरू होने के संकेत मिले हैं। पितृपक्ष से पहले आई इस खबर से श्रद्धालुओं, तीर्थ-पुरोहितों और स्थानीय लोगों की उम्मीदें फिर जागी हैं। हालांकि, सवाल अब भी कायम है कि क्या यह योजना धरातल पर उतरकर सफल होगी या फिर रबर डैम की तरह यह भी सीमित परिणाम तक ही रह जाएगी।
नई योजना से जगी उम्मीद
365 दिन पानी रहेगा तो बहुत अच्छा होगा
ओडिशा से पिंडदान करने आए श्रद्धालु जमुना साहुजा ने बताया कि वे अपने पिता और चाचा का तर्पण करने गयाजी पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष पहले उनके परिचितों ने यहां की व्यवस्था को लेकर कई शिकायतें बताई थीं, लेकिन इस बार व्यवस्था पहले से काफी बेहतर लगी। उन्होंने कहा कि यदि फल्गु नदी में पूरे वर्ष जलधारा बहे तो श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी। जिस तरह उनके क्षेत्र में गंगा और गोदावरी के किनारे हमेशा जल रहता है, उसी तरह गयाजी में भी सालभर जलधारा रहे तो यह अत्यंत सुखद होगा।
श्रद्धालु ने उठाए बुनियादी सुविधाओं के सवाल
रबर डैम की तरह यह योजना भी हो सकती है फेल
तीर्थ-पुरोहित पंडित बृजनंदन ओझा ने नई योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले भी करोड़ों रुपये खर्च कर रबर डैम बनाया गया, लेकिन उसका अपेक्षित लाभ नहीं मिला। उन्होंने कहा कि डैम में गाद और कचरा भर जाता है तथा नियमित सफाई नहीं होने से पानी गंदा और बदबूदार हो जाता है। उन्होंने धार्मिक मान्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि माता सीता के श्राप के कारण फल्गु नदी अंतःसलिला है और वर्षा ऋतु को छोड़कर इसमें स्थायी जलधारा नहीं रह सकती। उनका कहना था कि सरकार चाहे जितनी कोशिश कर ले, प्राकृतिक और धार्मिक मान्यताओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
नई योजना अच्छी है, लेकिन निगरानी जरूरी
विष्णुपद प्रबंधनकारिणी समिति के सदस्य और गयावल पंडा मणीलाल बारिक ने कहा कि फल्गु नदी में स्थायी जलधारा लाने का विचार नया नहीं है। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी गंडक नदी से जोड़कर फल्गु में पानी लाने की चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से बने रबर डैम से शुरुआती लाभ जरूर मिला, लेकिन बाद में पानी की सफाई, गंदगी और रखरखाव की समस्या सामने आ गई। छह बोरिंग के माध्यम से पानी की गुणवत्ता बनाए रखने की योजना बनाई गई थी, लेकिन उसका पूरा क्रियान्वयन नहीं हुआ।
मणीलाल बारिक ने आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण कार्य अधूरे रह गए, जिसके कारण रबर डैम अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार नई योजना लागू करती है तो उसकी निगरानी स्वयं करनी चाहिए, ताकि पिछली गलतियों की पुनरावृत्ति न हो। योजना पूरी तैयारी और वैज्ञानिक तरीके से लागू होगी, तभी स्थायी सफलता मिलेगी।
धार्मिक मान्यता भी चर्चा में
मणीलाल बारिक ने कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार माता सीता के श्राप के कारण फल्गु नदी की जलधारा भूमि के भीतर प्रवाहित होती है। पहले थोड़ी खुदाई करने पर पानी निकल आता था और आज भी कई स्थानों पर ऐसा देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन आधुनिक तकनीक के माध्यम से समाधान खोजने का प्रयास भी किया जाना चाहिए।
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सबसे बड़ा सवाल
गयाजी की फल्गु नदी के तट पर पिंडदान करते श्रद्धालु