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Bihar News: 13 साल पुराने सुमीरक यादव हत्याकांड में बड़ा फैसला, पूर्व विधायक रणजीत यादव समेत चार आरोपी बरी

Fri, 17 Jul 2026 07:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गयाजी,

सार

करीब 13 साल पुराने चर्चित सुमीरक यादव हत्याकांड में गया की एडीजे-3 अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए राजद के पूर्व विधायक रणजीत यादव समेत चार आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सका।
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गयाजी कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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करीब 13 साल पुराने चर्चित सुमीरक यादव हत्याकांड में गया की अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। एडीजे-3 अजित कुमार की अदालत ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पूर्व विधायक रणजीत यादव समेत चार आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका। फैसले के बाद एक ओर पीड़ित परिवार में निराशा है, तो दूसरी ओर पूर्व विधायक के समर्थकों ने राहत जताई।

साक्ष्य के अभाव में चारों आरोपियों को मिली राहत

शुक्रवार को एडीजे-3 की अदालत ने कांड संख्या 21/2013 की सुनवाई पूरी करते हुए पूर्व विधायक रणजीत यादव, उनके भाई विवेक यादव, साला पंकज यादव और दीपू को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध साक्ष्य आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए सभी आरोपियों को बरी किया जाता है।  मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता बनवारी प्रसाद, ताज अली और अमरेंद्र कुमार ने पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अरुण कुमार शर्मा और शकील अहमद ने दलीलें रखीं।

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राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई में हुई थी हत्या

यह मामला वर्ष 2013 का है। उस समय अतरी विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक वर्चस्व को लेकर तनाव बना हुआ था। 26 फरवरी 2013 को जदयू कार्यकर्ता सुमीरक यादव की हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि पार्टी कार्यालय से घर लौटते समय रास्ते में घात लगाए हमलावरों ने उन पर लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला किया, जिससे उनकी मौत हो गई।

जदयू कार्यालय को लेकर बढ़ा था विवाद

अभियोजन के मुताबिक, सुमीरक यादव अतरी क्षेत्र में जदयू के नए कार्यालय के संचालन में सक्रिय थे। इसी को लेकर इलाके में राजनीतिक तनाव बढ़ गया था। घटना के बाद मृतक के भाई विजय यादव के बयान पर नीमचक बथानी थाना में कांड संख्या 21/2013 दर्ज किया गया। उस समय इस हत्याकांड की पूरे बिहार में काफी चर्चा हुई थी।

कुंती देवी को पहले मिल चुकी थी उम्रकैद

पुलिस जांच के दौरान पूर्व विधायक कुंती देवी और उनके परिवार के कई सदस्यों के नाम इस मामले में सामने आए थे। वर्ष 2021 में इसी अदालत ने कुंती देवी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में जेल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद चला ट्रायल

पटना हाईकोर्ट ने रणजीत यादव के खिलाफ मुकदमा चलाने का रास्ता साफ किया था। उनकी याचिका खारिज होने के बाद स्पीडी ट्रायल के तहत सुनवाई शुरू हुई। लंबे समय तक गवाहों के बयान, दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच के बाद अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए रणजीत यादव समेत चारों आरोपियों को बरी कर दिया।

फैसले के बाद दोनों पक्षों की अलग-अलग प्रतिक्रिया

अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने निराशा जताई। वहीं, रणजीत यादव के समर्थकों ने फैसले का स्वागत करते हुए राहत व्यक्त की। अदालत परिसर के बाहर समर्थकों की भीड़ भी जुटी रही।

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