मगध क्षेत्र के युवाओं के लिए सोमवार यानी आज का दिन ऐतिहासिक साबित होने जा रहा है। गया जिले के खिजरसराय प्रखंड स्थित देवांग में करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी सेंटर का भूमिपूजन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को क्षेत्र में रोजगार, कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा के नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। भूमिपूजन के बाद मुख्यमंत्री विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे।
टेक्नोलॉजी सेंटर से खुलेगा विकास का नया अध्याय
लंबे समय से औद्योगिक और तकनीकी संस्थानों की कमी झेल रहे मगध क्षेत्र के लिए यह परियोजना बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। टेक्नोलॉजी सेंटर बनने से स्थानीय युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण, स्टार्टअप और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे। इससे न केवल रोजगार के नए द्वार खुलेंगे, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
युवाओं को मिलेगा मौका, पलायन पर लगेगी लगाम
क्षेत्र के बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि टेक्नोलॉजी सेंटर शुरू होने के बाद युवाओं को घर के आसपास ही प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। इससे पलायन में कमी आएगी और कुशल मानव संसाधन स्थानीय स्तर पर विकसित होगा।
90 हजार वर्ग मीटर में तैयार हुआ भव्य आयोजन स्थल
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। लगभग 90 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में विशाल पंडाल बनाया गया है, जहां हजारों लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, शौचालय और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। कार्यक्रम स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया है।
मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। मगध प्रमंडल आयुक्त, आईजी, डीएम और एसएसपी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर तैयारियों की समीक्षा की। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष टीम तैनात की गई है। वहीं यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए कई मार्गों पर प्रतिबंध और वैकल्पिक रूट निर्धारित किए गए हैं।
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भूमिपूजन के साथ जनसभा पर भी टिकी हैं सबकी नजरें
भूमिपूजन के बाद मुख्यमंत्री की जनसभा राजनीतिक और विकास, दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि यह परियोजना खिजरसराय ही नहीं, बल्कि पूरे मगध क्षेत्र के आर्थिक और तकनीकी विकास की नई आधारशिला साबित होगी।