फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वर्षावास: तीन महीने एक स्थान पर रहकर क्यों साधना करते हैं बौद्ध भिक्षु, क्या उद्देश्य है? जानिए सबकुछ

Fri, 11 Sep 2026 10:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गयाजी

सार

Bodhgaya News: बारिश के मौसम में मनाया जाने वाला वर्षावास बौद्ध भिक्षुओं की प्राचीन परंपरा है। इस दौरान वह एक स्थान पर रहकर साधना, धम्म अध्ययन, अहिंसा और समाज को धार्मिक मार्गदर्शन देते हैं। ऐसा वह क्यों करते हैं? इसके पीछे क्या उद्देश्य है? आइये जानते हैं सबकुछ...
विज्ञापन
पूजा अर्चना करते बौद्ध श्रद्धालु
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बारिश का मौसम शुरू होते ही बौद्ध विहारों में वर्षावास की परंपरा निभाई जाती है। इस दौरान बौद्ध भिक्षु तीन से चार महीने तक एक ही स्थान पर रहकर ध्यान, साधना, धम्म का अध्ययन और समाज को धार्मिक मार्गदर्शन देते हैं। अखिल भारतीय बौद्ध भिक्षु संघ के महासचिव प्रज्ञादीप भंते ने बताया कि यह परंपरा भगवान बुद्ध के समय से चली आ रही है और इसका उद्देश्य अहिंसा, आत्मशुद्धि तथा जीवों की रक्षा करना है।

विज्ञापन


तीन से चार महीने तक एक स्थान पर रहते हैं भिक्षु

  • प्रज्ञादीप भंते ने बताया कि वर्षावास के दौरान बौद्ध भिक्षु किसी एक विहार या मठ में तीन से चार महीने तक निवास करते हैं। इस अवधि में वे बाहरी यात्राएं नहीं करते, बल्कि ध्यान, साधना और धम्म के अध्ययन में अपना समय लगाते हैं। इससे उनका आध्यात्मिक विकास होता है और आत्मशुद्धि का मार्ग मजबूत होता है।


अहिंसा और जीवों की रक्षा का संदेश

  • प्रज्ञादीप भंते ने कहा कि वर्षा ऋतु में धरती पर छोटे-छोटे कीट-पतंगे, जीव-जंतु और नई घास उग आती है। यदि भिक्षु लगातार यात्रा करें तो अनजाने में इन जीवों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए भगवान बुद्ध ने वर्षावास की परंपरा शुरू की, ताकि किसी भी जीव की हिंसा न हो और अहिंसा का संदेश समाज तक पहुंचे।

विज्ञापन

बारिश में यात्रा से बचने की परंपरा

  • प्रज्ञादीप भंते ने बताया कि बरसात के समय नदियां उफान पर रहती हैं और कई रास्ते जलमग्न हो जाते हैं। ऐसे में यात्रा करना कठिन और जोखिम भरा होता है। इसलिए भिक्षु एक ही स्थान पर रहकर साधना करते हैं। यह व्यवस्था उनकी सुरक्षा के साथ-साथ अनुशासित जीवन का भी हिस्सा है।


धम्म का अध्ययन और समाज को मार्गदर्शन

  • वर्षावास के दौरान भिक्षु बौद्ध धर्म के नियमों, विनय और भगवान बुद्ध के उपदेशों का गहन अध्ययन और मनन करते हैं। इसी समय वह विहारों में आने वाले उपासक-उपासिकाओं को धम्म की देशना देते हैं। इससे लोगों को नैतिक जीवन, करुणा, अहिंसा और सदाचार का संदेश मिलता है तथा समाज में सकारात्मक सोच का विस्तार होता है। प्रज्ञादीप भंते ने कहा कि वर्षावास केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, सभी जीवों के प्रति करुणा, आत्मअनुशासन और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश देने वाली महान परंपरा है, जो आज भी बौद्ध समाज में पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाई जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें