भगवान बुद्ध की 2570वीं जयंती पर बोधगया शुक्रवार को पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंग जाएगा। विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, ध्यान और विश्व शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना का आयोजन किया जाएगा। समारोह में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। आयोजन में भारत समेत कई देशों से करीब दस हजार बौद्ध श्रद्धालुओं और भिक्षुओं के पहुंचने की संभावना है।
उत्सवी माहौल और भव्य सजावट
बुद्ध जयंती को लेकर बोधगया में उत्सवी माहौल दिखाई दे रहा है। महाबोधि मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी, पंचशील ध्वज और रंग-बिरंगे फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है। रात के समय मंदिर की जगमगाहट श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंदिर परिसर की सजावट दुल्हन की तरह की गई है, जिससे पूरा क्षेत्र अलौकिक आभा बिखेर रहा है।
तीन दिवसीय अनुष्ठान और आध्यात्मिक कार्यक्रम
तीन दिवसीय समारोह के दौरान महाबोधि मंदिर में विशेष अनुष्ठान, बौद्ध मंत्रोच्चार और ध्यान साधना कार्यक्रम आयोजित होंगे। महाबोधि मंदिर के पुजारी भिक्षु डॉ. मनोज थेरो ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि समस्त प्राणियों के कल्याण, रोगमुक्त समाज और सकारात्मक ऊर्जा के संदेश का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण की स्मृति में मनाई जाने वाली बुद्ध पूर्णिमा का बौद्ध धर्म में विशेष महत्व है।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन और बीटीएमसी ने व्यापक तैयारियां की हैं। कालचक्र मैदान में श्रद्धालुओं के लिए बैठने, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और स्वच्छता की विशेष व्यवस्था की गई है। वहीं गया रेलवे स्टेशन से बोधगया तक निःशुल्क वातानुकूलित बस सेवा भी शुरू की जा रही है। बीटीएमसी कार्यालय परिसर में पेयजल, जूस, चना-गुड़ सहित कई सेवा केंद्र स्थापित किए गए हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सुरक्षा के मद्देनजर महाबोधि मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। भीड़भाड़ वाले इलाकों में सादे वेश में पुलिसकर्मियों को लगाया गया है, जबकि मंदिर परिसर और कालचक्र मैदान के आसपास लगातार निगरानी की जा रही है।
दर्शन का समय बढ़ाया गया
बुद्ध जयंती के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए महाबोधि मंदिर के दर्शन का समय भी बढ़ाया गया है। बीटीएमसी के अनुसार गुरुवार और शुक्रवार को मंदिर रात 11 बजे तक खुला रहेगा। श्रद्धालु देर रात तक गर्भगृह में भगवान बुद्ध के दर्शन और साधना कर सकेंगे।