औरंगाबाद जिले के एक सरकारी स्कूल में 24 लाख के गबन का मामला प्रकाश में आया है। दरअसल, यह मामला औरंगाबाद के मदनपुर प्रखंड के वार स्थित राजकीय उच्च विद्यालय का है।
मामले का खुलासा करते हुए विधानसभा चुनाव में रफीगंज से प्रत्याशी रहे लोजपा (रामविलास) के प्रदेश महासचिव प्रमोद सिंह ने आरोप लगाया कि मदनपुर के वार के सरकारी हाईस्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक रवींद्र कुमार ने स्कूल की 24 लाख की राशि का गबन किया है। कहा कि 10 लाख की राशि एक ईंट-भट्ठा को दिया गया और शेष राशि की भी इसी फर्जी तरीके से निकासी की गई है, जबकि स्कूल में काम के नाम पर एक ईंट तक नहीं जोड़ा गया है।
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डीईओ की भी मिलीभगत
उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर जब जिला शिक्षा पदाधिकारी से बात की तो उनके द्वारा भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि इस बड़ी राशि के गबन में डीईओ की भी स्कूल के हेड मास्टर से मिलीभगत है।
मैट्रिक प्रायोगिक परीक्षा में बच्चों ने नहीं दिए पैसे तो रिजल्ट हुआ खराब
एलजेपीआर नेता ने यह भी आरोप लगाया कि हेड मास्टर ने अपने स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा देने वाले छात्रों का भी भविष्य खराब किया है। उसने मैट्रिक की प्रायोगिक परीक्षा में सही उत्तर देने के बावजूद पैसे नहीं मिलने को लेकर छात्रों को कम नंबर दिए हैं, जिससे स्टूडेंट्स का रिजल्ट खराब आया है। इस बात को स्कूल के विज्ञान शिक्षक ने भी स्वीकार किया है। शिक्षक ने कहा है कि हेड मास्टर ने प्रैक्टिकल के नाम पर बच्चों से पैसे लेने को कहा था। लेकिन बच्चों ने पैसे नहीं दिए। इसके बावजूद उन्होंने बच्चों द्वारा दिए गए सही उत्तर के आधार पर सही अंक दिए। लेकिन उनके द्वारा बच्चों को दिए गए अंक की अनदेखी कर हेड मास्टर ने अपने से मनमाने अंक भरकर बिहार बोर्ड को भेज दिया, जिससे स्कूल के बच्चों का रिजल्ट खराब आया।
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हेड मास्टर देता है विरोध करने वालों को एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी
कहा कि हेडमास्टर का मन बढ़ा हुआ है। वह पिछले 17 साल से इसी स्कूल में बना हुआ है। उसका एक महीने पहले ट्रांसफर भी हो गया है। लेकिन नए हेड मास्टर को वह प्रभार नहीं दे रहा है। वह मनमानी कर रहा है। मनमानी की शिकायत वे शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव एस सिद्धार्थ से भी करेंगे। कहा कि यह हेड मास्टर अपनी करतूतों से हमारी सरकार को बदनाम कर रहा है। उसकी औरंगाबाद के डीईओ से भारी मिलीभगत है। इतना ही नहीं हेडमास्टर यह भी कहता है कि डीईओ के कहने पर वे इलाके में उनकी पसंदीदा पार्टी को वोट भी दिलवाता है। साथ ही दलित होने का फायदा उठाते हुए विरोध करने वालों को अनुसूचित जाति अत्याचार अधिनियम के तहत केस में फंसाने की भी धमकी देता है। इस कारण वे एसीएस एस सिद्धार्थ से मांग करेंगे कि डीईओ को अलग रखकर किसी सीनियर अधिकारी से मामले की जांच कराई जाए।
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उन्होंने कहा कि वे किसी भी सूरत में हमारी सरकार को बदनाम किया जाना बर्दाश्त नहीं करेंगे।उनकी मांग है कि मामले की सही जांच हो और दोषी पर कार्रवाई हो। ऐसा नहीं होने पर आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। क्योंकि मेरे लिए मेरे क्षेत्र की जनता सर्वोपरि है और जनता के साथ नइंसाफी कतई बर्दाश्त नहीं कर सकता हूं।
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डीईओ ने कहा- मामले की जांच कर करेंगे कार्रवाई
मामले में पूछे जाने पर औरंगाबाद के जिला शिक्षा पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है। वे मामले की जांच करा रहे हैं। जांच में दोषी पाए जाने पर हेड मास्टर को निलंबित किया जाएगा। प्राथमिकी भी दर्ज कराई जाएगी और निकासी की गई राशि की रिकवरी भी कराई जाएगी। उन्होंने एलजेपीआर नेता द्वारा खुद पर लगाए गए हेड मास्टर से मिलीभगत के आरोपो पर कहा कि मैं कोई नेता नहीं हूं। इस कारण किसी नेता के आरोप पर कोई टीका-टिप्पणी नहीं करूंगा। मैं आरोपों की जांच कराऊंगा और कार्रवाई करूंगा।