बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब नवादा सदर से विधायक विभा देवी और रजौली से विधायक प्रकाश वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गया में आयोजित जनसभा के दौरान भाजपा के मंच पर नजर आए। दोनों विधायकों की मंच पर मौजूदगी ने साफ कर दिया कि वे अब पाला बदलने को तैयार हैं। इनकी उपस्थिति को केवल संयोग नहीं, बल्कि रणनीतिक सियासी कदम माना जा रहा है।
नाराजगी की पृष्ठभूमि
दरअसल, जदयू के दो पुराने और प्रभावशाली नेताओं के राजद पार्टी में शामिल होने के बाद से ही विभा देवी और प्रकाश वीर की नाराजगी की खबरें सामने आ रही थीं। कुछ सप्ताह पहले जदयू के पूर्व विधायक कौशल यादव, उनकी पत्नी और गोविंदपुर की पूर्व विधायक पूर्णिमा यादव, तथा जदयू के पूर्व एमएलसी सलमान रागिब उर्फ मुन्ना मियां ने राजद का दामन थामा था। इससे नवादा जिले की राजनीति में शक्ति संतुलन बदलता हुआ नजर आया। नाराजगी की सबसे बड़ी वजह लोकसभा चुनाव में रहा जहां लोकसभा चुनाव में राजबल्लभ यादव के भाई विनोद यादव को राजद टिकट न देकर श्रवण कुशवाहा को टिकट दे दिया गया ।टिकट मिलने से नाराज राजबल्लभ प्रसाद यादव के भाई विनोद यादव ने निर्दलीय चुनाव लड़कर राजद विभा देवी और प्रकाशवीर ने विनोद यादव का खुलकर साथ दिया जिसके बाद लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव राजबल्लभ परिवार से नाराज चल रहे थे।
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यह है असली वजह
जानकारी के अनुसार, विभा देवी और प्रकाश वीर को आशंका थी कि पार्टी आगामी चुनावों में टिकट वितरण को लेकर नया समीकरण अपना सकती है, जिससे उनके राजनैतिक भविष्य पर असर पड़ सकता है। इसी असंतोष की परिणति पीएम मोदी की सभा में उनकी सार्वजनिक उपस्थिति के रूप में सामने आई।
विभा देवी और राजबल्लभ यादव का राजनीतिक प्रभाव
विभा देवी, जिनके पति राजबल्लभ प्रसाद यादव बिहार सरकार में पूर्व मंत्री रह चुके हैं, नवादा जिले की राजनीति में एक मजबूत नाम हैं। हाल ही में राजबल्लभ यादव पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक चर्चित मामले में पटना हाईकोर्ट से बरी हो गए हैं। उनकी कानूनी वापसी ने यादव परिवार को फिर से सक्रिय राजनीति में मजबूती से उतार दिया है। अब अगर विभा देवी भाजपा में जाती हैं तो यह नवादा में महागठबंधन के लिए गंभीर झटका साबित हो सकता है।
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रजौली से प्रकाश वीर की रणनीति
प्रकाश वीर, जो रजौली से विधायक हैं, की भी अपने क्षेत्र में पकड़ मजबूत मानी जाती है। वे पार्टी नेतृत्व से संवाद की कमी और स्थानीय नेतृत्व को नजरअंदाज करने को लेकर नाराज चल रहे थे। भाजपा मंच पर उनकी मौजूदगी संकेत दे रही है कि वे अगले चुनाव में एनडीए खेमे से चुनाव लड़ने को तैयार हैं।
भाजपा का शुद्धिकरण अभियान और चुनावी रणनीति
भाजपा ने आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न जिलों में मजबूत चेहरों की तलाश शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गया यात्रा को केवल धार्मिक या औपचारिक कार्यक्रम मानना भूल होगी — इसके पीछे पार्टी की स्पष्ट रणनीति नजर आती है कि स्थानीय प्रभावशाली नेताओं को अपने पाले में लाकर महागठबंधन को कमजोर किया जाए।
आगे क्या?
भले ही अभी तक विभा देवी और प्रकाश वीर की ओर से राजद से औपचारिक इस्तीफे की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन गया में मंच पर उनकी उपस्थिति के राजनीतिक मायने बेहद स्पष्ट हैं। आने वाले दिनों में इनके भाजपा में औपचारिक शामिल होने की घोषणा हो सकती है। नवादा और रजौली जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अगर ये दोनों विधायक भाजपा में शामिल होते हैं तो इससे महागठबंधन को बड़ा राजनीतिक नुकसान हो सकता है।