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Bihar News: जेजे बोर्ड ने विधि विरूद्ध किशोर को सुनाई अनोखी सजा, सरकारी अस्पताल में 7 दिन करे सामुदायिक सेवा

Sat, 11 Oct 2025 07:05 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद

सार

Bihar News: औरंगाबाद के किशोर न्याय परिषद ने पूर्व में भी विधि विवादित किशोरों को सुधरने का मौका देते हुए सामुदायिक सेवा करने के ऐसे कई फैसले दिए है। इस साल बोर्ड का यह तीसरा अनूठा फैसला है।
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व्यवहार न्यायलय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विधि विरुद्ध किशोरों को अनूठी सजा दिए जाने के लिए चर्चित बिहार के औरंगाबाद के किशोर न्याय परिषद ने एक बार फिर अनोखी सजा सुनाई है। बोर्ड ने ताजा फैसले में एक विधि विरुद्ध किशोर को सरकारी अस्पताल में सात दिनों की सामुदायिक सेवा करने की सजा सुनाई है। बोर्ड के प्रधान दंडाधिकारी सह अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश(एसीजेएम) सुशील प्रसाद सिंह ने शनिवार को ओबरा थाना कांड संख्या-151/19 और जेजेबी वाद संख्या-191/25 में निर्णय पर सुनवाई करते हुए विधि विवादित किशोर को यह सजा सुनाई।        

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सात दिनों की सामुदायिक सेवा करेगा विधि विवादित किशोर
पैनल अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि जेजे बोर्ड ने इस वाद के विधि विवादित किशोर को ओबरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सात दिनों की सामुदायिक सेवा करने का आदेश किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 18(1)(सी) के तहत दिया है। बोर्ड ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को आदेश दिया है कि किशोर न्याय अधिनियम की धारा-74 का पालन हर हाल में होना चाहिए और किसी भी सूरत में विधि विवादित किशोर की पहचान या जानकारी उजागर नहीं होनी चाहिए।

साथ ही बोर्ड ने अस्पताल प्रबंधन को आदेश दिया है कि विधि विवादित किशोर की सामुदायिक सेवा अवधि पूर्ण होने पर उसके आचरण और व्यवहार से संबंधित प्रतिवेदन किशोर न्याय बोर्ड में समर्पित करना सुनिश्चित करना होगा। अधिवक्ता ने बताया कि बीएनएस की छोटी धाराओं में  व्यवहार न्यायालय को भी सामुदायिक सेवा का आदेश  जारी करने का अधिकार है। कोर्ट छोटे मामलों में ऐसे आदेश जारी कर सकते हैं। छोटे मामलों में औरंगाबाद की अदालतों से पूर्व में भी ऐसे आदेश जारी हुए है।       
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जेजे बोर्ड का यह तीसरा अनोखा फैसला
औरंगाबाद के किशोर न्याय परिषद ने पूर्व में भी विधि विवादित किशोरों को सुधरने का मौका देते हुए सामुदायिक सेवा करने के ऐसे कई फैसले दिए है। इस साल बोर्ड का यह तीसरा अनूठा फैसला है। बोर्ड ने इसी साल 20 अगस्त को एक विधि विवादित किशोर को विश्व प्रसिद्ध देव सूर्य मंदिर में 15 दिनों की सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया था। इसके बाद 26 अगस्त को भी बोर्ड ने एक विधि विरूद्ध किशोर को रफीगंज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दस दिनों की सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया था और ताजा फैसले में भी बोर्ड ने विधि विवादित किशोर को ओबरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सात दिनों की सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया है।

नजीर बन रहे जेजे बोर्ड के फैसले
अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही किशोर न्याय बोर्ड के अनूठे फैसलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बोर्ड के ये फैसले नजीर साबित हो रहे है। इन फैसलों से न केवल विधि विरुद्ध किशोरों को सुधरने का मौका मिले रहा है बल्कि समाज को भी यह संदेश जा रहा है कि अपराध की राह छोड़कर सकारात्मक दिशा में भी आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि बोर्ड के ये फैसले एक तरह के दंड है, जो अन्य किशोरों को भी अपराध से दूर रहने की प्रेरणा दे रहे है।

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