प्रधानमंत्री आवास योजना में अनियमितता की शिकायतें अब आम हो गई हैं, जिसे सरकार और प्रशासन ने गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में, शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए आवास सहायकों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। औरंगाबाद में भी ऐसी ही एक शिकायत पर बड़ी कार्रवाई हुई है। जिलाधिकारी श्रीकांत शास्त्री ने गुरुवार को ओबरा प्रखंड की उब पंचायत के ग्रामीण आवास सहायक रविश कुमार भारती को बर्खास्त कर दिया है। उन पर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही, लाभार्थियों से अवैध राशि की वसूली और नियम विरुद्ध कार्य करने का आरोप है। इसी वजह से उन्हें सेवा से हटाया गया है।
एकौना गांव के लाभार्थियों ने की थी शिकायत
दरअसल, उब पंचायत के एकौना गांव के लाभार्थियों ने औरंगाबाद के जिलाधिकारी से आवास सहायक की शिकायत की थी। शिकायत में लाभार्थियों ने आरोप लगाया था कि आवास सहायक योजना की किस्त जारी करने के लिए अवैध राशि की मांग कर रहा था।
आरोपों की जिलाधिकारी ने कराई जांच
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) के निदेशक (लेखा, प्रशासन एवं स्व-नियोजन) से मामले की जांच कराई। उनकी स्थलीय जांच में आरोपों की पुष्टि हुई कि रविश कुमार भारती ने न केवल योजनागत प्रक्रिया का उल्लंघन किया, बल्कि कार्य पूर्ण होने के बावजूद लाभार्थियों को समय पर राशि जारी नहीं की, जिससे योजना के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हुई।
डीडीसी ने भी पाया आवास सहायक को दोषी
मामले की सुनवाई और तथ्यों के परीक्षण के बाद औरंगाबाद की उप विकास आयुक्त अनन्या सिंह ने भी रविश कुमार भारती को कार्य में लापरवाही बरतने, निजी स्वार्थ के लिए कार्य करने एवं अवैध वसूली करने का दोषी मानते हुए सेवा से बर्खास्त करने की जिलाधिकारी से अनुशंसा की। इसके बाद जिलाधिकारी ने ग्रामीण आवास सहायक को बर्खास्त कर दिया।
भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनाई जा रही 'जीरो टॉलरेंस' की नीति
जिलाधिकारी श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि औरंगाबाद जिला प्रशासन द्वारा भ्रष्टाचार के मामलों में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई गई है। इसके तहत जिले के सभी प्रखंडों में आवास योजना एवं आवास सर्वे कार्य की नियमित समीक्षा एवं स्थलीय जांच कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि पूर्व में उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाए जाने पर सभी स्तर के कर्मियों और पदाधिकारियों पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। भ्रष्टाचार के मामले में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति के तहत ही आवास सहायक को बर्खास्त किया गया है।