बिहार की एक अदालत ने औरंगाबाद के जिलाधिकारी रहे बिहार सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के विशेष सचिव कंवल तनुज को कोर्ट में तलब किया है। मामला गलत अभियोजन की स्वीकृति देने से जुड़ा है।
मामले में औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय के जिला एवं सत्र न्यायाधीश-2 विश्व विभूति गुप्ता की अदालत ने तलब करते हुए कहा कि तत्कालीन डीएम और पुलिस के निर्णय में अंतर क्यों है? मामले को लेकर अदालत में चल रहे एसटीआर-354/17, 313/23 एवं दाउदनगर थाना कांड संख्या-53/17 की सुनवाई करते हुए जिला जज ने मंगलवार को तत्कालीन जिलाधिकारी कंवल तनुज को अधिकारिक रूप से न्यायालय में उपस्थित होने को कहा। मामले में कोर्ट ने तत्कालीन जिलाधिकारी को तलब करते हुए वाद की सुनवाई की अगली तारीख पांच मई निर्धारित की है।
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यह है मामला
अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि तत्कालीन जिलाधिकारी कंवल तनुज ने इस वाद में भारतीय शस्त्र अधिनियम की धारा-39 के तहत अभियुक्त के विरुद्ध धारा 25(1-बी)ए और 26 आर्म्स एक्ट के तहत अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की थी। जबकि अभियोजन स्वीकृति के लिए आवेदन दाउदनगर के तत्कालीन पुलिस अवर निरीक्षक अनील कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक ने 25 (1-बी) एवं 26 (2) में भेजा था। मामले में अदालत में भी संज्ञान एवं आरोप गठन 25(1-बी) और 26(2) में हुआ है।
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गलत अभियोजन की स्वीकृति देने के कारण कोर्ट ने किया तलब
कोर्ट ने इस वाद में गलत अभियोजन की स्वीकृति देने के कारण ही तत्कालीन जिलाधिकारी को तलब किया है। मामले में कोर्ट यह जानना चाहता है कि पुलिस के निर्णय और जिलाधिकारी के निर्णय में अंतर क्यों है?
अभियुक्त के अधिवक्ता ने कोर्ट में उठाया था मामला
अधिवक्ता ने बताया कि मामले में अभियुक्त के अधिवक्ता ने अनुसंधानकर्ता और पुलिस अधीक्षक द्वारा 25(1-बी) एवं 26(2) के तहत अभियोजन की स्वीकृति के लिए दिए गए आवेदन से इतर 25(1-बी)ए और 26 आर्म्स एक्ट में जिलाधिकारी द्वारा अभियोजन की स्वीकृति पर कोर्ट में इस मामले को उठाया था। इसी बात की अदालत ने नोटिस ली और तत्कालीन जिलाधिकारी को तलब करते हुए कहा कि वें अदालत में उपस्थित होकर यह बताए कि पुलिस के निर्णय और उनके निर्णय में यह अंतर क्यों है?