Bihar : पुलिस की कार्यशैली पर अक्सर सवाल उठता रहा है। बिहार की एक अदालत ने पुलिस अधीक्षक को शोकॉज किया है। अदालत ने एसपी से सात दिनों के अंदर शोकॉज का जवाब मांगा है।
बिहार की एक अदालत ने 34 साल पुराने मामले में पुलिस अधीक्षक को शोकॉज किया है। मामला औरंगाबाद जिले का है। यह शोकॉज औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश(एडीजे)-2 विश्व विभूति गुप्ता की अदालत ने शनिवार को किया है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि 34 साल से एफएसएल की रिपोर्ट को पेश नही किया जाना गंभीर मामला है।
एफएसएल की रिपोर्ट पेश नही किए जाने से ट्रायल लंबित रहना अभियुक्त के अधिकारों का हनन
एफएसएल की रिपोर्ट पेश नही किए जाने से मामले का विचारण लंबित रहना अभियुक्त के मूलभूत अधिकारों का हनन है। इसके लिए औरंगाबाद के पुलिस अधीक्षक कोर्ट को सात दिनों के अंदर यह कारण बताए कि किन कारणों में एफएसएल की रिपोर्ट पुलिस द्वारा कोर्ट में अभी तक पेश नही की गई।
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सात दिनों के अंदर शोकॉज का जवाब दे एसपी
अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि कोर्ट में सेशन ट्रायल संख्या-58/25, हसपुरा थाना कांड संख्या-98/91 में आरोप गठन पर ट्रायल चल रहा है। इस वाद में एफएसएल की रिपोर्ट लंबित रहने से वाद लंबित है। इसे लेकर ही न्यायालय ने गहरी नाराजगी जताई और पुलिस अधीक्षक को शोकॉज किया। साथ ही जिलाधिकारी से वाद से संबंधित विषय पर मंजूरी आदेश देने का पत्र भेजा। एपीपी श्याम नंदन तिवारी ने बताया कि मामले की प्राथमिकी संख्या-98/91भादंवि की धारा 147, 148, 149, 307, 353, 27आर्म्स एक्ट और 3/5 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत में हसपुरा थाना में दर्ज कराई गई थी। यह मामला 34 साल पुराना है और कोर्ट ने मामले का विचारण लंबित रहना अभियुक्त के मूलभूत अधिकारों का हनन माना है। साथ ही शोकॉज का जबाब सात दिनों के अंदर देने को कहा है।