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Bihar: पासपोर्ट वेरिफिकेशन में हुई गलती! दो पुलिस अफसरों पर CJM कोर्ट में चलेगा मामला, JJ Board ने दिया आदेश

Sat, 23 May 2026 05:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद

सार

Bihar: औरंगाबाद के किशोर न्याय बोर्ड ने पासपोर्ट वेरिफिकेशन रिपोर्ट में जेजे एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने के आरोप में दो पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में परिवाद दायर करने का आदेश दिया है। बोर्ड ने इसे किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74(2) का गंभीर उल्लंघन माना है।
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औरंगाबाद कोर्ट
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विस्तार
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प्रावधानों के विपरीत विधि विरुद्ध किशोर के चरित्र सत्यापन और पासपोर्ट वेरिफिकेशन में प्रतिकूल टिप्पणी करने को बिहार के औरंगाबाद के किशोर न्याय परिषद ने बेहद गंभीरता से लिया है। इसे लेकर जेजे बोर्ड के प्रधान दंडाधिकारी सह एसीजेएम सुशील प्रसाद सिंह ने शनिवार को मामले में शामिल दो पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में आधिकारिक परिवाद दायर किए जाने का आदेश दिया है।

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पासपोर्ट वेरिफिकेशन रिपोर्ट में जेजे एक्ट का उल्लंघन
अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि औरंगाबाद नगर थाना कांड संख्या-93/2018, जीआर-472/18 एवं जेजेबी वाद-120/25 के विधि विरुद्ध किशोर ने पासपोर्ट के लिए आवेदन दिया था। आवेदन के आलोक में पासपोर्ट कार्यालय द्वारा औरंगाबाद नगर थाना से प्रतिवेदन की मांग की गई थी। इसी मामले में औरंगाबाद नगर थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष प्रशांत कुमार एवं जांचकर्ता चंदन दास ने चरित्र प्रमाण पत्र और पासपोर्ट सत्यापन रिपोर्ट में जेजे एक्ट के विरुद्ध प्रतिवेदन समर्पित किया था, जो अधिनियम की धारा 74(2) का उल्लंघन माना गया है।

किशोरों के वाद का उल्लेख नहीं करने का है प्रावधान
अधिवक्ता ने बताया कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत बालकों के किसी भी अभिलेख में किशोर न्याय बोर्ड के वाद का उल्लेख नहीं करने का स्पष्ट प्रावधान है। साथ ही अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध अनुसंधान विभाग), बिहार द्वारा जारी पत्रांक 127/2000 में भी स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि किसी विधि विरुद्ध किशोर के वाद का जिक्र किशोर न्याय बोर्ड से बाहर नहीं किया जाए। इसके बावजूद पासपोर्ट वेरिफिकेशन रिपोर्ट में पुलिस पदाधिकारियों द्वारा किशोर के वाद का उल्लेख कर प्रावधानों की अनदेखी की गई।
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जेजे बोर्ड ने माना गंभीर मामला
इस अनदेखी को जेजे बोर्ड ने बेहद गंभीरता से लिया। मामले की सम्यक जांच के बाद बोर्ड ने दोनों पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 74(2) के उल्लंघन के आरोप में व्यवहार न्यायालय, औरंगाबाद के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) कोर्ट में परिवाद संस्थित करने का आदेश जारी किया। इसके साथ ही बोर्ड के कार्यालय लिपिक को दोनों पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ आधिकारिक परिवाद दायर करने के लिए आवश्यक सभी दस्तावेज मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में भेजने का निर्देश दिया गया है।

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