बिहार की राजनीति में एक चौंकाने वाला मोड़ आया जब भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार के पूर्व सहकारिता मंत्री रामाधार सिंह ने अपनी ही बेटी भाजपा नेत्री कमला सिंह को बेटी मानने से इनकार कर दिया। ‘वह मेरी बेटी नहीं है, वह उस दिन से मेरी बेटी नहीं रही, जिस दिन से उसने पूर्व सांसद सुशील सिंह का साथ दिया,’ यह बयान देकर रामाधार सिंह ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। उनके इस बयान ने न केवल 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान की विचारधारा को चुनौती दी है, बल्कि परिवार और राजनीति के बीच खिंचती गहरी लकीर को भी उजागर कर दिया है।
भाजपा टिकट की दावेदारी पर बिफरे रामाधार सिंह
जानकारी के मुताबिक, शनिवार को आयोजित प्रेसवार्ता में रामाधार सिंह ने कमला सिंह की औरंगाबाद विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने साफ कहा कि लोग टिकट के मुगालते में न रहें। भाजपा में मेरे प्रति हमदर्दी रखने वाले नेताओं की कमी नहीं है और विधानसभा चुनाव में पार्टी हर हाल में मुझे ही टिकट देगी।
रामाधार सिंह ने भाजपा में अपने योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी को ‘अपने खून-पसीने से सींचा है’ और इसलिए उन्हें टिकट न देने की अटकलें बेबुनियाद हैं। वहीं, उन्होंने कमला की दावेदारी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘पार्टी में किसी भी कार्यकर्ता को टिकट मांगने का अधिकार है, लेकिन कमला मेरी बेटी नहीं है।’
आरके सिंह के समर्थन में आए रामाधार सिंह
अपने बयान में रामाधार सिंह ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद आरके सिंह के बगावती सुरों का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि आरके सिंह पार्टी के वफादार कार्यकर्ताओं की लड़ाई लड़ रहे हैं, और मैं भी यही लड़ाई पहले से लड़ रहा हूं। हम दोनों मिलकर समर्पित कार्यकर्ताओं को मुख्यधारा में लाने के लिए संघर्ष करेंगे और आयातित नेताओं को किनारे लगाएंगे।
‘मैं ताउम्र उनकी बेटी रहूंगी’
पिता के इस बयान पर भाजपा नेत्री कमला सिंह ने संयमित लेकिन तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रामाधार सिंह की तीन बेटियां हैं और मैं उन्हीं में से एक हूं। उनके कहने से यह सच नहीं बदल सकता। कमला सिंह ने कहा कि मेरे पिता अस्वस्थ चल रहे हैं, उन्हें दो बार पैरालिसिस का अटैक आ चुका है। ऐसी स्थिति में कभी-कभी वे ऐसी बातें बोल देते हैं, जो उन्हें नहीं बोलनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है, वे भी चुनाव लड़ना चाहते हैं और मैं भी। पार्टी जिसे भी टिकट देगी, मैं उसका समर्थन करूंगी। अगर पार्टी मुझे टिकट देती है, तो मुझे पिता का आशीर्वाद जरूर मिलेगा।
पारिवारिक विवाद से भाजपा की राजनीति में भूचाल
रामाधार सिंह का यह बयान भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। एक ओर पार्टी 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा बुलंद कर रही है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के वरिष्ठ नेता अपनी ही बेटी से सार्वजनिक रूप से नाता तोड़ने का एलान कर रहे हैं।