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Bihar News: ‘पुलिस नहीं अदालत करेगी फैसला’ गया में गरजे आनंद मोहन; इनकाउंटर और बुलडोजर संस्कृति पर उठाए सवाल

Sat, 20 Jun 2026 05:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया

सार

गया में महाराणा प्रताप जयंती समारोह में पहुंचे पूर्व सांसद आनंद मोहन ने बिहार में हो रहे पुलिस इनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी अधिकारी को इनकाउंटर करने का अधिकार नहीं है और आरोपी के दोषी या निर्दोष होने का फैसला केवल अदालत कर सकती है।
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गया में पत्रकारों से बातचीत करते पूर्व सांसद आनंद मोहन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती के अवसर पर गया पहुंचे पूर्व सांसद आनंद मोहन ने बिहार में हो रहे पुलिस इनकाउंटर को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जगह पर हथियार लहराना गलत है, लेकिन किसी भी पुलिस अधिकारी को इनकाउंटर करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी आरोपी के दोषी या निर्दोष होने का फैसला अदालत करेगी, पुलिस नहीं।

इनकाउंटर और बुलडोजर संस्कृति का किया विरोध

गया जिले के मानपुर स्थित एक निजी होटल में आयोजित समारोह के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए आनंद मोहन ने कहा कि लोकतंत्र किसी भी युवक को खुलेआम रिवॉल्वर लहराने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने कहा कि जो लोग हथियार लेकर घूम रहे थे, वे निहत्थे नहीं थे, लेकिन इसके बावजूद वे इनकाउंटर और बुलडोजर संस्कृति के विरोधी हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस का काम अपराधी को गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश करना है, न कि मौके पर ही फैसला सुनाना।

'फैसला कोर्ट करेगा, पुलिस नहीं'

आनंद मोहन ने कहा कि अगर पुलिस ही मौके पर फैसला करने लगे तो फिर अदालत और न्यायपालिका की जरूरत ही क्या रह जाएगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कानून का राज होना चाहिए और हर आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया आज पहले से अधिक जागरूक है, इसलिए तथ्यों के आधार पर ही चर्चा होनी चाहिए।

यादव-तिवारी विवाद पर टिप्पणी से किया इनकार

इनकाउंटर को लेकर चल रही जातीय बहस पर पूछे गए सवाल के जवाब में आनंद मोहन ने कहा कि कौन विरोध कर रहा है और कौन समर्थन, इससे उन्हें कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ वही बात कह रहे हैं जो उन्हें सही लगती है। उन्होंने दोहराया कि लोकतंत्र में न तो किसी को हथियार लहराने का अधिकार है और न ही किसी अधिकारी को इनकाउंटर करने का। यादव और तिवारी विवाद पर टिप्पणी करने से भी उन्होंने इनकार कर दिया।

महाराणा प्रताप जयंती समारोह में बड़ी संख्या में जुटे लोग

आनंद मोहन महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने गया पहुंचे थे। पटना से गया तक उनके समर्थकों ने जगह-जगह फूल-माला और अंगवस्त्र देकर स्वागत किया। कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में महाराणा प्रताप के अनुयायी मौजूद रहे।

28 जून के कार्यक्रम का दिया निमंत्रण

उन्होंने बताया कि वे महाराणा प्रताप जयंती समारोह में शामिल होने के साथ-साथ 28 जून को सीतामढ़ी में प्रस्तावित प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम का निमंत्रण देने भी आए हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही अपने पुराने साथियों के साथ बैठकर बिहार की मूलभूत समस्याओं पर व्यापक चर्चा की जाएगी।

'बिहार में दो धाराएं चल रही हैं'

आनंद मोहन ने कहा कि बिहार में दो तरह की विचारधाराएं चल रही हैं। एक धारा महाराणा प्रताप के आदर्शों पर चलने वालों की है, जो संघर्ष और अधिकारों की लड़ाई लड़ते हैं। दूसरी धारा मान सिंह के रास्ते पर चलने वालों की है, जिन्हें सुविधाएं तो मिल जाती हैं लेकिन नेतृत्व की क्षमता नहीं होती।

सम्राट चौधरी को पूरा कार्यकाल देने की वकालत

राजनीतिक सवालों पर उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी को उनका पूरा कार्यकाल मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीच में नेतृत्व बदलने से समाज में गलत संदेश जाता है। पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों में उनके नेतृत्व को लेकर सकारात्मक माहौल बना है, जिसे बनाए रखना जरूरी है।

चेतन आनंद पर बोले- किसी का एहसान नहीं

अपने पुत्र चेतन आनंद को लेकर पूछे गए सवाल पर आनंद मोहन ने कहा कि एनडीए ने किसी पर कोई एहसान नहीं किया है। उन्होंने कहा कि चेतन आनंद ने कठिन परिस्थितियों में चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की है। जनता का विश्वास और संघर्ष ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है।

'थैली संस्कृति' पर साधा निशाना

आनंद मोहन ने कहा कि राजनीति में बढ़ रही थैली संस्कृति और अवसरवाद लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आज लगभग हर राजनीतिक दल गिरोह की तरह काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को सबक सिखाने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए ही वे बिहार दौरे पर निकले हैं।

निशांत कुमार वाले बयान पर दी सफाई

निशांत कुमार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर दिए गए कथित बयान पर आनंद मोहन ने कहा कि उनके वक्तव्य को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भी व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की। उनका कहना था कि जदयू कार्यकर्ताओं की इच्छा थी कि निशांत कुमार राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएं, लेकिन परिस्थितियां अलग दिशा में चली गईं।

मीडिया से की अपील

आनंद मोहन ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों की स्वतंत्रता और स्वस्थ बहस बेहद जरूरी है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि किसी भी बयान को संदर्भ से काटकर पेश करने के बजाय पूरी बात जनता के सामने रखी जाए।

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