बिहार में मकर संक्रांति का बहु प्रतिक्षित भोज राजनीति की खिचड़ी पकाने का एक अवसर होता है। इस वर्ष भी संक्रांति के भोज में जमकर राजनीतिक खिचड़ी पकाई जा रही है। वैसे जदयू और भाजपा की खिचड़ी से महागठबंधन का दही खट्टा हो गया है।
एक ओर जहां भाजपा ने लालू के भोज में यह कहते हुए जाने से इनकार कर दिया कि उन्हें सही तरीके से निमंत्रित नहीं किया गया है, वहीं कांग्रेस की ओर से अब तक यह साफ नहीं है कि जदयू के भोज में जाने की स्थिति साफ नहीं की। वैसे लालू ने दही का टीका नीतीश कुमार के माथे पर लगाकर जहां महागठबंधन के अटूट रहने का संदेश दिया है, वहीं नीतीश कुमार ने लालू का आशीर्वाद लेकर यह भरोसा दिलाया कि कलेंडर जरूर नए साल में बदला है, लेकिन उसके अंदर की तस्वीर वक्त से पहले नहीं बदलेगी।
सुशील मोदी ने बिहार की राजनीति में होने वाले संभावित परिवर्तन के सवाल पर कहा कि परिवर्तन संसार का नियम है, ऐसे में कब, कौन, कहां बदल जाए ये कौन जानता है। उल्लेखनीय है कि राजद प्रमुख लालू यादव के सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड पर संक्रांति भोज का शनिवार को पहला आयोजन हुआ। वहीं रविवार को जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह के घर दूसरा आयोजन होगा। इन दोनों आयोजनों में बिहार की आने वाली राजनीति की खिचड़ी पकने की उम्मीद जताई जा रही है।