भ्रष्टाचार मामले में अंदर तक शामिल बताए जा रहे लालू यादव, उनके परिवार और जुडे़ लोगों पर जिस तरह से कार्रवाई में ढिलाई बरती जा रही है उससे शक और गहरा गया है। अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने यह चिट्ठी इस साल 14 अप्रैल को रेलवे बोर्ड के प्रिंसपल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर विजिलेंस को लिखी थी। इस चिट्ठी में सीबीआई ने तत्कालीन ग्रुप जनरल मैनेजर और मौजूदा रेलवे बोर्ड के एडिशनल मेंबर के तौर पर काम कर रहे बी के अग्रवाल के खिलाफ केस चलाने की अनुमति मांगी थी।
तीन महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक रेलवे ने किसी तरह की अनुमति नहीं दी है। अगर रेलवे ने अनुमति दे दी होती तो आरोपियों को कोर्ट आना पड़ता और आरोप तय होते। सीबीआई को अगर रेलवे से अनुमति मिल गयी होती तो आरोपियों की गिरफ्तारी तक हो सकती थी। जिन धाराओं में केस दर्ज हुआ है वो गैर जमानती धाराएं हैं, जाहिर है इससे लालू, राबड़ी और तेजस्वी के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाती। लेकिन अभी तक कुछ भी ऐसा नहीं हुआ है।
लालू यादव पर क्या हैं आरोप
जब लालू यादव रेल मंत्री थे तब उनपर टेंडर निकालने से लेकर सुजाता ग्रुप को रेलवे का होटल दिलाने के कई आरोप लगे हैं। यही नहीं उनपर होटर से जुड़े विज्ञापन और टेंडर की प्रक्रिया में बदलाव को लेकर भी कई गंभीर आरोप लगे हैं। यह भी कहा जाता रहा है कि लालू अन्य टेंडर भर रहे लोगों को टेंडर न भरने की धमकी पोन करके दी थी। होटल की जमीन उन्होंने अपने करीबी को दी। उसके बाद आरोप यह बी लगा कि उनके करीबी ने कंपनी के शेयर राबड़ी देबी और तेजस्वी को बेची