महंथ आचार्य सुदर्शनाचार्य
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इंदिरा गांधी के समय भी किया गया था परेशान
मठ के महंथ आचार्य सुदर्शनाचार्य का कहना है कि इससे पहले भी इस जगह को परेशान करने की कोशिश की गई थी लेकिन लोग कामयाब नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि बात इंदिरा गांधी के समय की है। उस समय मैं नहीं था, मेरे स्वामी जी थे। मठ की जमीन को हथियाने की कोशिश की जा रही थी। उस समय पटना के डीएम बी.एस. दूबे थे। ये लोग उस समय महात्मा और महंतों से जबरन जमीन रजिस्ट्री करवाते थे। स्वामी जी को यह जानकारी मिली कि आज रात आपको गिरफ्तार कर लिया जाएगा और पटना ले जाकर आपसे जबरन जमीन रजिस्ट्री करवाई जाएगी। यह सूचना मिलते ही स्वामी जी सीधे दिल्ली चले गए और वहां एक परिचित शख्स लालबाबू से मिले। लालबाबू स्वामी जी के भी उतने ही प्रिय थे जितना इंदिरा गांधी के नजदीकी थे। लालबाबू स्वामी जी को लेकर सीधे इंदिरा गांधी के पास पहुंचे और जमीन के सारे दस्तावेजों को दिखाते हुए सारी बातें कहीं। इसके बाद इंदिरा गांधी के तरफ से पटना के डीएम को फोन आया कि स्वामी जी को तंग नहीं किया जाय। उसके बाद वह मामला वहीँ समाप्त हो गया।
लालू प्रसाद यादव ने भी उजाड़ने का किया था काम
मठ के महंथ आचार्य सुदर्शनाचार्य का कहना है कि जब लालू जी का समय आया तब एक बार फिर उसी तरह की परेशानी शुरू हुई। यह वह समय था जब यादव-भूमिहारवाद चल रहा था। रामकृपाल यादव और श्याम रजक ने लालू यादव को गलत तरीके से कुछ ऐसा समझा दिया कि लालू जी ने मठ को उजाड़ देने का आदेश दे दिया। इसके लिए उन्होंने मठ की सारी जमीनों को बंटवाना शुरू कर दिया। हमने जमीन और मठ की संपत्ति को बचाने के लिए इससे पहले 3 बार सरकार को कोर्ट में हराया है, और यह चौथी बार लड़ाई लालू जी के साथ हुई।
डीएम थी राजबाला वर्मा
उस समय पटना की डीएम राजबाला वर्मा थी। लालू जी ने राजबाला वर्मा को बुलाया और कहा कि 8 दिन के अंदर मठ की सारी जमीन को बांट दो। उस समय देश में आईपीएफ का बोलबाला था। आरपीएफ बार-बार पेपर बाजी करते रहता था कि मठ की सारी संपत्ति पर कब्जा कर लिया जाएगा। सारी जमीन बंटनी शुरू हो गई। हमारे यहां केसी बधार नाम का एक गांव है जहां अब मात्र 6 बीघा जमीन बच गया था। इस बीच मैं हाईकोर्ट पहुंचा गया था। हाई कोर्ट ने तुरंत स्टे लगा दिया। यह आदेश उस दिन आया था जब अंतिम दिन जमीन बंट रही थी। कोर्ट ने एक ऐसा निर्णय दिया कि बिहार सरकार अब इस मामले में कभी हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
ऐसा करने के पीछे यह थी वजह
मठ के महंथ आचार्य सुदर्शनाचार्य ने बताया कि लालू जी को यह बताया गया था कि मठ बहुत ही मजबूत संस्था है। यहां के आदेश को ही लोग मानते हैं। वर्तमान समय वोट का है और राजनीति वोट से चलती है। इसलिए इस मठ का महंथ हमारे राजनीतिक समीकरण के गणित को गलत न कर दे इसलिए मठ को बर्बाद करना जरूरी है। लेकिन कुछ दिन के बाद जब वह यहां आए तो उनकी सारी गलतफहमियां दूर हो गई और लालू जी ने ही यहां संस्कृत विद्यालय का भवन बनवाने के लिए 51 लाख रुपया दिया। इसलिए जो इस जगह की खिलाफत करेगा वह औंधे मुंह गिरेगा। इसलिए इस जगह को न तो लालू जी कुछ बिगाड़ पाए और न कोई और (तेज प्रताप यादव) बिगाड़ पाएगा।