दशहरा महोत्सव में कलाकारों ने बांधा समा।
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पटना में गांधी मैदान में आयोजित दशहरा महोत्सव के तीसरे दिन मंगलवार को भक्ति संगीत, सूफियाना गीतों, सुगम संगीत और लोकनृत्य की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान खींचा। कलाकारों ने गणेश वंदना और देवी स्तुति से कार्यक्रम की शुरुआत की, वहीं मैथिली लोकगीतों पर आधारित नृत्य ने बिहार की पारंपरिक संस्कृति की झलक दिखाई। पूर्व डीजीपी आलोक राज और इंडियन आइडल फेम गायिका सौम्या मिश्रा की प्रस्तुतियां भी सांस्कृतिक संध्या के प्रमुख आकर्षणों में रहीं।
गणेश वंदना और देवी स्तुति से शुरुआत
सांस्कृतिक कार्यक्रम का आगाज अमृता सिन्हा की गणेश वंदना और भक्ति गीतों से हुआ। उनकी प्रस्तुति ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद निशिता झा ने ‘जय जय भैरवी, असुर भयावनी’ देवी स्तुति प्रस्तुत कर शक्ति उपासना की परंपरा को सुरों के जरिए सामने रखा। सूफियाना संगीत का रंग तब देखने को मिला, जब अमीर खुसरो की प्रसिद्ध रचना ‘छाप तिलक सब छीनी रे, मोसे नैना मिलाइके’ की प्रस्तुति दी गई। प्रेम, समर्पण और आत्मीयता के भावों से जुड़ी इस रचना ने कार्यक्रम में संगीत का अलग रंग भर दिया।
राम भक्ति और मैथिली लोकनृत्य ने मोहा मन
राधा सिन्हा सांस्कृतिक सामाजिक सेवा संस्थान के कलाकारों ने नृत्य प्रस्तुतियों के जरिए सांस्कृतिक संध्या को आगे बढ़ाया। ‘मेरे घर राम आए हैं’ गीत पर प्रस्तुत भावनृत्य में भगवान श्रीराम के आगमन से जुड़े उल्लास और श्रद्धा को नृत्य मुद्राओं के माध्यम से दर्शाया गया। इसके बाद मैथिली के पारंपरिक विवाह गीत पर आधारित नृत्य ने मिथिला की विवाह परंपराओं और पारिवारिक आत्मीयता को मंच पर उतारा। मैथिली लोकगीत ‘अइथिन सइयाँ हमार, कगवा बोल ई छै’ पर कलाकारों की प्रस्तुति में मिथिलांचल के लोकजीवन और परंपराओं की झलक दिखाई दी।
सौम्या मिश्रा ओर आलोक राज ने बांधा समां।
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पूर्व डीजीपी आलोक राज ने गाए सदाबहार गीत
पूर्व डीजीपी आलोक राज ने अपनी गायकी से दर्शकों का मनोरंजन किया। उन्होंने ‘तुमको भी हमसे मोहब्बत हो जरूरी तो नहीं’, ‘किस मोड़ से शुरू करें फिर ये जिंदगी’, ‘जिंदगी का सफर है ये कैसा सफर’ और ‘खामोश लब हैं, झुकी हैं पलकें’ जैसे सदाबहार गीत प्रस्तुत किए। उनकी गायकी ने कार्यक्रम में सुगम संगीत का रंग घोला।
सौम्या मिश्रा के गीतों पर झूमे दर्शक
इंडियन आइडल फेम गायिका सौम्या मिश्रा ने देवी स्तुति से अपनी प्रस्तुति शुरू की। इसके बाद उन्होंने ‘हमें तुमसे प्यार कितना’, ‘दिल का क्या करें साहिब’ और ‘कजरा मोहब्बत वाला’ जैसे लोकप्रिय गीत गाए। उनकी आवाज और गीतों की प्रस्तुति ने दर्शकों को संगीत के अलग-अलग रंगों से रूबरू कराया। दशहरा महोत्सव की तीसरी शाम में भक्ति, सूफियाना संगीत, सदाबहार गीतों और बिहार की लोक परंपराओं का मेल देखने को मिला। गांधी मैदान का मंच कलाकारों की प्रस्तुतियों के जरिए सांस्कृतिक विविधता और संगीत की परंपरा को सामने लाता रहा।