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बिहार के आरा में पत्रकार की मौत हत्या या हादसा?

Mon, 26 Mar 2018 01:38 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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बिहार के भोजपुर जिले के गडहनी ब्लॉक के नहसी पुल पर दैनिक भास्कर के पत्रकार नवीन निश्चल की रविवार की रात 'गाड़ी से टक्कर' में मौत हो गई। हालांकि ये हत्या है या सड़क दुर्घटना, इसको लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। भोजपुर के गडहनी थाने के बगबां गांव के 35 वर्षीय नवीन के साथ 25 साल के विजय सिंह भी थे। हादसे के बाद उनकी भी मौके पर ही मौत हो गई। इन दो मौतों के बाद नाराज़ स्थानीय लोगों ने गाड़ी में आग लगा दी।

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सोमवार को भी स्थानीय लोगों के प्रदर्शन का सिलसिला जारी है। दैनिक अखबार का कहना है कि उसके पत्रकार नवीन निश्चल और उनके साथी विजय सिंह को रविवार रात जीप से कुचलकर मारा गया है। नवीन निश्चल के भाई राजेश सिंह ने बीबीसी से कहा कि उनके भाई की हत्या की गई है।

विवाद की जानकारी

राजेश सिंह ने बताया, "तकरीबन रात 8 के आसपास वो रामनवमी जुलूस की कवरेज के बाद बाइक से घर लौट रहे थे। गडहनी बाजार में उनकी पूर्व मुखिया मोहम्मद हरसू से किसी बात पर लड़ाई हुई जिसके बाद वो घर की तरफ लौटने लगे। लेकिन हरसू ने गाड़ी से कुचलकर उनकी हत्या कर दी।" राजेश ने इस बात से इनकार किया है कि मोहम्मद हरसू या किसी भी अन्य व्यक्ति से नवीन का किसी भी तरह का विवाद था। भोजपुर एसपी अवकाश कुमार ने बीबीसी से कहा कि किसी भी तरह के पूर्व विवाद की जानकारी परिवारवालों ने नहीं दी है।
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अवकाश कुमार ने बीबीसी से कहा, "मामला दर्ज हो गया है पूर्व मुखिया मोहम्मद हरसू और उनके बेटे को अभियुक्त बनाया गया है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। हरसू के ख़िलाफ़ किसी तरह के आपराधिक केस की जानकारी अभी तक नहीं है लेकिन उनका बेटा शराब से जुड़े एक मामले में जेल गया था।" समाचार एजेंसी पीटीआई ने अवकाश कुमार के हवाले से लिखा है, "नवीन निश्चल के भाई राजेश ने एफआईआर में ये आरोप लगाया है कि ये कत्ल का मामला है और पंचायत के मुखिया अहमद अली और उनके बेटे डबलू इसमें शामिल हैं।"

पत्रकारों की सुरक्षा

हालांकि स्थानीय पत्रकार प्रशांत कुमार का कहना है, "पहले से ही दोनों के बीच में खबरों को लेकर विवाद था क्योंकि लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे नवीन को पूर्व मुखिया के कामकाज की गड़बड़ियों के बारे में सिर्फ सतही नहीं बल्कि अंदरूनी जानकारी थी।" साल 2016 में सिवान के पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या के बाद भी पत्रकारों की सुरक्षा का मसला जोर शोर से उठा था। लेकिन उसके बाद भी बिहार में खासतौर पर जिला और ब्लॉक में करने वाले पत्रकारों पर हमले लगातार होते रहे। पटना प्रेस क्लब का प्रभार देख रहे पत्रकार अनवर सईद सरकार से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहते हैं, "पत्रकारों की सुरक्षा का मसला हम कई बार सरकार के सामने उठा चुके हैं, लेकिन सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।"

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