सार
समस्तीपुर के रोसड़ा में 35 वर्षीय मधुमाला देवी शारदीय नवरात्र में 2516 नुकीली कीलों से बनी सेज पर लेटकर मां दुर्गा की आराधना कर रही हैं। परिजनों के अनुसार, स्वप्न में दर्शन के बाद उनकी आस्था और गहरी हुई।
शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु अलग-अलग तरीके से अपनी आस्था व्यक्त कर रहे हैं। इसी बीच समस्तीपुर जिले के रोसड़ा की रहने वाली मधुमाला देवी अपनी कठिन साधना को लेकर चर्चा में हैं। वह 2516 नुकीली कीलों से बनी सेज पर लेटकर मां दुर्गा की आराधना कर रही हैं। उनके सीने पर कलश स्थापित है और पास में त्रिशूल रखा है। मधुमाला नवरात्र के पहले दिन से ही निर्जला व्रत रखकर यह साधना कर रही हैं।
रोसड़ा शहर के महादेव मठ स्थित वार्ड संख्या 12 के चौरसिया टोला में रहने वाली 35 वर्षीय मधुमाला की इस साधना को देखने के लिए आसपास के लोगों में उत्सुकता है। परिजनों के अनुसार, उनकी आस्था मां दुर्गा के प्रति गहरे विश्वास से जुड़ी है। उनकी अनूठी साधना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
2516 कीलों से तैयार की गई सेज
मधुमाला की साधना के लिए लकड़ी का एक विशेष बेड तैयार कराया गया है। जमीन से करीब 15 इंच ऊंचे इस बेड की लंबाई छह फीट और चौड़ाई साढ़े तीन फीट है। इसकी सतह पर पांच इंच लंबी 2516 नुकीली कीलें ठोकी गई हैं। परिजनों के मुताबिक, इन कीलों का कुल वजन करीब 32 किलोग्राम है। कीलों से बनी इस सेज पर एक पतली चादर बिछाई गई है। मधुमाला इसी पर लेटकर मां दुर्गा की आराधना कर रही हैं। परिजनों का कहना है कि वह नवरात्र के दौरान अन्न-जल ग्रहण किए बिना व्रत और साधना कर रही हैं।
पढे़ं: पटना में एक बैरिकेड तोड़ आगे बढ़े AISA-RYA के प्रदर्शनकारी; डाकबंगला चौराहे की ओर आवाजाही प्रभावित
स्वप्न में दर्शन के बाद बढ़ी मां के प्रति आस्था
मधुमाला देवी के पति रंजीत चौरसिया के अनुसार, करीब दो वर्ष पहले मधुमाला को स्वप्न में मां दुर्गा के दर्शन हुए थे। इसके बाद से उनकी पूजा-पाठ के प्रति आस्था और गहरी हो गई। परिजनों के मुताबिक, पिछले वर्ष शारदीय नवरात्र में मधुमाला ने विधि-विधान से कलश स्थापित कर व्रत रखा था। उनकी मान्यता है कि नवमी के दिन उनकी मनोकामना पूरी हुई और उसी दिन घर में धरती से मां दुर्गा की प्रतिमा प्रकट हुई। इस दावे के बाद परिजनों ने घर में देवी की प्रतिमा स्थापित करने के लिए मंदिर का निर्माण कराया। अब इसी मंदिर के सामने मधुमाला कीलों की सेज पर लेटकर मां दुर्गा की आराधना कर रही हैं। उनके लिए यह साधना देवी के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है।
शादी के 16 साल, दो बच्चों की मां हैं मधुमाला
मधुमाला देवी की शादी करीब 16 वर्ष पहले रंजीत चौरसिया से हुई थी। दंपती के एक 14 वर्षीय पुत्र और 12 वर्षीय पुत्री हैं। रंजीत रोसड़ा बाजार में कपड़े की दुकान चलाते हैं। रंजीत के अनुसार, मधुमाला जब से उनके घर आई हैं, तभी से मां दुर्गा की पूजा-पाठ में उनकी विशेष रुचि रही है। नवरात्र के अवसर पर उनकी कठिन साधना आसपास के लोगों के बीच कौतूहल का विषय बनी हुई है। कीलों से बनी सेज, सीने पर स्थापित कलश और सामने स्थित देवी मंदिर के बीच मधुमाला की आराधना को देखने के लिए लोग उत्सुक हैं।