बिहार के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. चंद्रशेखर सिंह यादव द्वारा 11 जनवरी 2023 को रामचरित मानस के खिलाफ दिए गए विवादित बयान को लेकर दर्ज मुकदमे में सुनवाई शुरू हो गई है। इस मामले में अति पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री हरि सहनी ने शुक्रवार को दरभंगा कोर्ट में उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री के बयान को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, 11 जनवरी 2023 को बिहार के तत्कालीन शिक्षा मंत्री डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने रामचरित मानस को लेकर एक विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि रामचरित मानस नफरत फैलाने वाला ग्रंथ है। इस बयान के बाद पूरे देश में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। तब इसे हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाने वाला बयान बताया गया था। इस विवादित बयान के विरोध में 12 जनवरी 2023 को तत्कालीन भाजपा के एमएलसी हरि सहनी ने दरभंगा कोर्ट में चंद्रशेखर सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
‘यह हिंदू आस्था का घोर अपमान है’
मंत्री हरि सहनी ने कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि रामचरित मानस हिंदू धर्म का पवित्र ग्रंथ है। यह केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक धरोहर भी है। चंद्रशेखर का यह बयान 130 करोड़ भारतीयों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है और यह हिंदू आस्था का घोर अपमान है।
उन्होंने आगे कहा कि रामचरित मानस के खिलाफ इस तरह के अपमानजनक बयान न केवल सनातन धर्म पर चोट हैं, बल्कि यह समाज में सांप्रदायिक तनाव भी पैदा करते हैं। डॉ. चंद्रशेखर का बयान शिक्षा मंत्री रहते हुए दिया गया, जो राज्य और समाज हित में बिल्कुल नहीं है। मुझे पूरा विश्वास है कि न्यायालय इस गंभीर अपराध के लिए कठोर से कठोर सजा सुनिश्चित करेगा।
यह था डॉ. चंद्रशेखर का बयान
डॉ. चंद्रशेखर ने 11 जनवरी 2023 को रामचरित मानस को नफरत फैलाने वाला ग्रंथ बताते हुए कहा था कि यह ग्रंथ समाज में विभाजन और नफरत को बढ़ावा देता है। उनके इस बयान से न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में विवाद खड़ा हो गया था। कई संगठनों ने उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था और यह मामला राजनीतिक तूल पकड़ गया था।
मुकदमे की सुनवाई हुई शुरू
मंत्री हरि सहनी द्वारा दर्ज कराए गए इस मुकदमे पर अब कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। मंत्री हरि सहनी ने कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराते हुए कहा कि रामचरित मानस जैसे पवित्र ग्रंथ के खिलाफ इस तरह के बयान से देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अपमान हुआ है। उन्होंने चंद्रशेखर के बयान को हिंदू धर्म और उसकी मान्यताओं का घोर अपमान करार दिया।
डॉ. चंद्रशेखर द्वारा दिए गए इस बयान का असर समाज में व्यापक रूप से देखा गया था। हिंदू संगठनों और राजनीतिक दलों ने इस बयान की कड़ी आलोचना की थी। खासकर भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने इसे हिंदू धर्म के खिलाफ एक बड़ी साजिश बताते हुए इसका विरोध किया था। मंत्री हरि सहनी ने अपने बयान में कहा कि यह बयान समाज में विभाजनकारी शक्तियों को बढ़ावा देता है और धार्मिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाता है।
अगली सुनवाई और संभावित परिणाम
इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि अभी तय नहीं हुई है वहीं, मंत्री हरि सहनी ने विश्वास जताया कि न्यायालय चंद्रशेखर सिंह को उनके बयान के लिए सख्त सजा देगा, ताकि भविष्य में इस तरह की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली बयानबाजी पर रोक लग सके।