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Bihar: नई पीढ़ी ने संभाली कामेश्वर धार्मिक ट्रस्ट की बागडोर, महाराज ने किया 108 मंदिरों के जीर्णोद्धार का ऐलान

Tue, 27 Jan 2026 11:05 AM IST
दरभंगा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा

सार

दरभंगा राज की अंतिम महारानी के निधन के बाद ट्रस्ट की बागडोर नई पीढ़ी के हाथ में आ गई है, जिन्होंने देश-विदेश में स्थित मंदिरों और संपत्तियों के संरक्षण को अपनी प्राथमिकता बताया है।
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नए महाराज ने संभाली बागडोर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दरभंगा राज की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी के निधन के बाद कुमार कपिलेश्वर सिंह और राजेश्वर सिंह ने कामेश्वर धार्मिक ट्रस्ट का प्रभार ग्रहण कर लिया है। प्रभार संभालने के बाद दोनों ने कहा कि ट्रस्ट के अधीन देश और विदेश में कुल 108 मंदिर हैं। इनमें वाराणसी में चार मंदिर शामिल हैं, जबकि पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी मंदिर तथा ट्रस्ट की संपत्तियां मौजूद हैं, जो वर्तमान में जर्जर स्थिति में हैं। अब इन सभी मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया जाएगा।

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कुमार कपिलेश्वर सिंह ने कहा कि दादी के निधन के बाद ट्रस्ट से जुड़े सभी कार्यों की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर आ गई है। उन्होंने बताया कि महारानी के निधन के बाद न्यायालय के निर्देश पर ट्रस्ट की समस्त संपत्ति का अधिकार उन्हें और उनके भाई राजेश्वर सिंह को प्राप्त हुआ है। इसे लेकर ट्रस्ट के पुराने सदस्यों के साथ लंबे समय तक न्यायालय में मामला चला। हाल ही में महारानी के निधन से पूर्व ही अदालत का फैसला कुमार कपिलेश्वर सिंह के पक्ष में आया था।

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प्रभार ग्रहण करने के बाद कुमार कपिलेश्वर सिंह ने कहा कि अब ट्रस्ट से जुड़े सभी कार्यों को पारदर्शी और सुव्यवस्थित तरीके से संचालित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कामेश्वर धार्मिक न्यास ट्रस्ट के अधीन देशभर में कुल 108 मंदिर हैं, जिनमें वाराणसी में चार मंदिर हैं। इसके अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी मंदिर और ट्रस्ट की काफी संपत्तियां हैं, जिनकी स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। अब दोनों भाई इन जर्जर मंदिरों का जीर्णोद्धार कराएंगे।
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वहीं राजेश्वर सिंह ने कहा कि जब महाराज ने इस ट्रस्ट की स्थापना की थी, तब मंदिरों के संचालन और ट्रस्ट में कार्यरत लोगों के लिए पर्याप्त भूमि और तालाब भी दिए गए थे, ताकि उनकी आय से मंदिरों का रखरखाव किया जा सके लेकिन समय के साथ यह व्यवस्था कमजोर पड़ गई। अब उनके प्रभार में आने के बाद इन सभी संसाधनों का सही तरीके से रखरखाव किया जाएगा और मंदिरों की व्यवस्था को फिर से मजबूत किया जाएगा।

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