दरभंगा जिले के बहेड़ा थाना कांड संख्या 282/20 में युवक मुकेश कुमार झूठे दुष्कर्म मुकदमे में 20 साल की सजा काट रहा था, जिसे हाईकोर्ट ने नवंबर 2024 में बरी कर दिया था। आज वह रिहा होकर घर पहुंच गया है। अब बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने इस मामले में तत्कालीन डीएसपी, थानाध्यक्ष और अनुसंधानक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
दुष्कर्म के मामले में फंसाकर जेल भेजने वाले तत्कालीन बेनीपुर के एसडीपीओ उमेश्वर चौधरी (वर्तमान में डीएसपी पालीगंज टू) दोषी पाए गए। बहेड़ा थानाध्यक्ष सुनील कुमार वर्तमान में मधुबनी जिला में पदस्थापित हैं। जबकि केस के अनुसंधानक जावेद आलम वर्तमान में सारण जिला के अवतारनगर थाना में पदस्थापित हैं। इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने कार्रवाई का निर्देश दिया है।
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डीजीपी के निर्देश पर एसएसपी जगुनाथ रेड्डी ने मधुबनी और सारण जिला के एसपी को निलंबित करने को कहा है। इस दुष्कर्म के झूठे मामले के आरोपी मुकेश कुमार को मिली उम्रकैद की सजा को पटना हाईकोर्ट ने झूठा करार देते हुए उसे बरी कर दिया था।
जानकारी के मुताबिक, यह मामला वर्ष 2020 का है। जब तत्कालीन थानाध्यक्ष सुनील कुमार बहेड़ा थाना में गांव की एक लड़की से एक वर्ष तक शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के मामले में प्राथमिकी 283/20 दर्ज कराई गई थी। इस मामले का अनुसंधानक जावेद आलम को बनाया गया था। थानाध्यक्ष द्वारा आरोपी को घटना के दिन ही गिरफ्तार करने की बात कही गई थी। लेकिन जांच के दौरान मुकेश कुमार से की गई बातचीत का पक्ष लगाया ही नहीं गया। इस केस में अनुसंधानक ने बिना जांच प्रतिवेदन आगे बढ़ाए ही आरोप पत्र कोर्ट में सौंप दिया। इतना ही नहीं इतने गंभीर मामले में सबूतों का संकलन भी सही तरीके से नहीं किया गया। साथ ही 57 मिनट के उस ऑडियो क्लिप को सुरक्षित किया, जिसमें पीड़ित के पिता से पंचायत के दौरान छह लाख रुपये की मांग की जा रही थी। उसे न देने के कारण निर्दोष को आरोपी बना दिया गया था।
जानकारी के अनुसार, बहेड़ा थानाक्षेत्र के एक गांव में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म मामले में मुकेश कुमार की गिरफ्तारी आठ अगस्त 2020 को हुई थी। इसके बाद मुकेश तीन दिसंबर 2024 को वह दरभंगा जेल से बाहर आया। तब से उसे न्याय दिलाने के लिए कोशिश जारी है। दरभंगा पॉक्सो कोर्ट ने 29 नवंबर 2023 को आरोपित को दोषी पाते हुए 20 साल की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 28 नवंबर 2024 को आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।
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गौरतलब है कि केस के अनुसंधानक जावेद आलम ने हाईकोर्ट में आरोपी को निर्दोष बताया था। उन्होंने कहा था कि मुकेश पूरे मामले में निर्दोष है और उसी गांव का दिनेश कुमार असली दोषी है। लेकिन वरीय पदाधिकारी के दबाव में मुकेश के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया। इस मामले की तमाम गवाही और सुनवाई के बाद दरभंगा कोर्ट ने 29 नवंबर 2023 को आरोपी मुकेश कुमार को इस मामले में दोषी पाते हुए 20 वर्ष कारावास की सजा सुनाई थी। इस मामले को लेकर आरोपी के परिवार ने सामाजिक कार्यकर्ता रवींद्रनाथ सिंह से मदद की गुहार लगाई थी। उन्होंने इस मामले में पीड़ित परिवार की मदद के लिए पटना हाईकोर्ट में अधिवक्ता ओम प्रकाश की मदद से सजा के खिलाफ अपील दायर की थी, जिसकी सुनवाई के बाद पटना हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार और राजेश वर्मा की खंडपीठ ने तेजी से सुनवाई कर आरोपी मुकेश को सजामुक्त करने का आदेश दिया। मामले में दोषमुक्त होने के बाद मुकेश कुमार को आज जेल से रिहा कर दिया, जिससे आज उसके घर और परिवार में खुशी का माहौल है।