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Bihar News: JDU विधायक का आरोप, दरभंगा विश्वविद्यालय के कुलपति और कुलसचिव ने दलित छात्र को HOD बनने से रोका

Sat, 21 Mar 2026 09:24 AM IST
दरभंगा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा

सार

Bihar News: दरभंगा के जदयू विधायक विनय कुमार चौधरी ने कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति और कुलसचिव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे दलित विरोधी मानसिकता रखते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय में अनियमितताओं, कर्मचारियों का बकाया वेतन, पेंशन वितरण न होना और छात्रों के रिजल्ट व अंक पत्र न देने जैसी समस्याओं का हवाला दिया।
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JDU MLA विनय चौधरी
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विस्तार
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दरभंगा के बेनीपुर से जदयू विधायक विनय कुमार चौधरी ने कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति और कुलसचिव के खिलाफ अनियमितता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। विधायक की शिकायत पर राजभवन के उपसचिव अजित कुमार सिंह ने उन्हें पत्र लिखकर जांच कराने की बात कही है।

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छात्रों को परीक्षा के बाद भी नहीं दिया जा रहा अंक पत्र
विधायक विनय कुमार चौधरी ने बताया कि कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति और कुलसचिव के खिलाफ विधानसभा में शिक्षा मंत्री से जांच की मांग की गई थी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्रों को परीक्षा के बाद अंक पत्र नहीं दिया जा रहा है। छात्रों की यह प्राथमिक आवश्यकता है कि रिजल्ट आने के तुरंत बाद उन्हें अंक पत्र मिलें, लेकिन यह कई दिनों से नहीं हो रहा है।

कर्मचारियों को नहीं किया जा रहा भुगतान
विधायक ने कुलपति और कुलसचिव को दलित विरोधी मानसिकता का बताया है। उन्होंने कहा कि साहित्य विभाग में एक दलित समुदाय का छात्र विभागाध्यक्ष बनने का दावा कर रहा है, लेकिन कुलपति और कुलसचिव उसे विभागाध्यक्ष बनने से रोक रहे हैं। वहीं, सरकार से वेतन और पेंशन की राशि मिलने के बावजूद कर्मचारियों को भुगतान नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में बिना विभागाध्यक्ष के कई विभाग संचालित किए जा रहे हैं, जो विश्वविद्यालय आयोग के नियमों के बिल्कुल खिलाफ है।
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HOD के बिना किसी भी विभाग का संचालन संभव नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार की ओर से पेंशनधारियों के लिए दिया गया 178 करोड़ रुपये का वितरण भी नहीं किया गया है। विश्वविद्यालय आयोग द्वारा शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी, लेकिन कुलपति और कुलसचिव ने उनकी नियुक्ति नहीं की। बाद में उनकी नियुक्ति हुई, लेकिन पिछले 18 महीने से उनका वेतन भी भुगतान नहीं किया गया है।

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उन्होंने कहा कि जब राज्य सरकार विश्वविद्यालय को समय पर वेतन और पेंशन के लिए पैसा देती है, फिर भी कुलपति और कुलसचिव द्वारा भुगतान नहीं किया जाता है। साहित्य विभाग में एक दलित छात्र विभागाध्यक्ष बनने का दावा कर रहा है, लेकिन कुलपति और कुलसचिव उसे यह अवसर नहीं दे रहे हैं। ये दोनों अधिकारी दलित विरोधी मानसिकता के हैं।

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