सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान दरभंगा जिले के छह परीक्षा केंद्रों से छह 'मुन्ना भाइयों' को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में कुछ अभ्यर्थी दूसरे उम्मीदवारों के स्थान पर परीक्षा दे रहे थे, जबकि कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से नकल करने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से ब्लूटूथ सहित कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में सॉल्वर गैंग के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।
छह परीक्षा केंद्रों से पकड़े गए फर्जी अभ्यर्थी
जानकारी के अनुसार, देशरत्न राजेंद्र प्रसाद बालिका उच्च विद्यालय, मारवाड़ी कॉलेज, एमएलएसएम कॉलेज, एमआरएम कॉलेज सहित अन्य परीक्षा केंद्रों से कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। परीक्षा के दौरान संदिग्ध गतिविधियां सामने आने पर जांच की गई, जिसके बाद फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
ब्लूटूथ और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के सहारे नकल की तैयारी
गिरफ्तार आरोपियों के पास से ब्लूटूथ डिवाइस समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। आशंका है कि इन उपकरणों के जरिए परीक्षा में उत्तर उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी।प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि परीक्षा में फर्जी तरीके से पास कराने के लिए प्रति अभ्यर्थी लगभग छह लाख रुपये में सौदा तय किया गया था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क और सॉल्वर गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है।
जुड़वां भाइयों के नाम पर भी फर्जीवाड़े की कोशिश
जांच के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। बताया जा रहा है कि दो जुड़वां भाइयों के नाम पर दो अलग-अलग मुन्ना भाई परीक्षा में शामिल होने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है।
14 जून को पूर्णिया, 18 जून को दरभंगा में परीक्षा देता पकड़ा गया आरोपी
गिरफ्तार भोजपुर निवासी पन्नालाल पाठक के पुत्र अमित कुमार पाठक के मामले ने जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है। पूछताछ में उसने बताया कि वह 14 जून को पूर्णिया में आयोजित सिपाही भर्ती परीक्षा में भी शामिल हो चुका है। उसने पुलिस को दिए आवेदन में स्वीकार किया है कि उसने मैट्रिक परीक्षा दो बार पास की थी और अलग-अलग प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल कर परीक्षा में शामिल हुआ।
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एमआरएम कॉलेज में पकड़ा गया अमित कुमार
अमित कुमार पाठक बुधवार को दरभंगा के एमआरएम कॉलेज परीक्षा केंद्र पर परीक्षा दे रहा था, तभी जांच के दौरान उसकी पहचान संदिग्ध पाई गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसने परीक्षा में शामिल होने के लिए किन दस्तावेजों और तरीकों का इस्तेमाल किया। पुलिस का मानना है कि यह मामला केवल कुछ फर्जी अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे संगठित सॉल्वर गैंग सक्रिय हो सकता है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।