दरभंगा में प्रस्तावित मिथिला ग्रीनफील्ड टाउनशिप परियोजना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। बिहार सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत दरभंगा के बहादुरपुर, हनुमाननगर और केवटी प्रखंड के कुल 102 गांवों को चिन्हित किया गया है। लगभग 12 हजार एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस टाउनशिप को शहर के विस्तार और आधुनिक शहरी सुविधाओं के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक को लेकर उठे सवाल
परियोजना क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री पर 31 मार्च तक रोक लगाए जाने के फैसले को लेकर स्थानीय स्तर पर प्रतिक्रिया सामने आई है। प्रमंडलीय चेंबर ऑफ कॉमर्स ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि अचानक जरूरत पड़ने पर जमीन बेचने की बाध्यता भी होती है। ऐसे में पूर्ण प्रतिबंध से आम लोगों और व्यापारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, संगठन ने टाउनशिप विकास के फैसले को सराहनीय भी बताया है।
चयनित गांवों में तेजी से हो रही पहचान और सर्वे
टाउनशिप के लिए बहादुरपुर के 17 राजस्व गांवों के साथ-साथ हनुमाननगर और केवटी प्रखंड के गांवों को भी शामिल किया गया है। फूलबरिया, जलबार, महनौली, दलौर, सोभन, भरोल, चांडी, गोढ़ियारी, बलिया और तालपुपरी जैसे गांव इस योजना के दायरे में हैं। इसके अलावा शहर से सटे शुभंकरपुर और रत्नोपट्टी जैसे इलाकों को भी जोड़ा गया है। प्रशासन इन क्षेत्रों में सर्वे और अन्य प्रक्रियाओं को आगे बढ़ा रहा है।
स्थानीय प्रतिनिधियों ने जताई विकास की उम्मीद
जिला मुखिया संघ के अध्यक्ष राजीव चौधरी ने ग्रीनफील्ड टाउनशिप को दरभंगा के लिए बड़ा अवसर बताया है। उनका कहना है कि जमीन की खरीद-बिक्री पर अस्थायी रोक से भविष्य में जमीन मालिकों को बेहतर लाभ मिल सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह परियोजना ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर दरभंगा के शहरी विकास को नई दिशा देगी।
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एम्स के आसपास विकसित होगा टाउनशिप क्षेत्र
जिलाधिकारी कौशल कुमार के अनुसार, निर्माणाधीन एम्स के आसपास के इलाके को टाउनशिप के रूप में विकसित करने की योजना है। शोभन, बलिया मौजा और चांडी गांव के क्षेत्रों को इसके लिए चिन्हित किया गया है। प्रशासन द्वारा इन इलाकों में निर्माण कार्य और जमीन की खरीद-बिक्री पर फिलहाल रोक लगाई गई है, ताकि परियोजना को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।