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राज्यपाल के आगमन से पहले संस्कृत विश्वविद्यालय में बवाल; कर्मचारियों का उग्र प्रदर्शन, आत्मदाह का प्रयास

Tue, 21 Apr 2026 09:29 PM IST
दरभंगा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा

सार

दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में राज्यपाल आगमन से पहले वेतन-पेंशन को लेकर कर्मचारियों का उग्र प्रदर्शन हुआ। आत्मदाह का प्रयास भी हुआ। जनप्रतिनिधि धरने में शामिल हुए। हंगामे के चलते सीनेट बैठक टल गई और कुलपति पर गंभीर आरोप लगे।

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प्रदर्शन करते कर्मचारियों से वार्ता करते कुलपति लक्ष्मी निवास पाण्डेय - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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बिहार के एकमात्र कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में राज्यपाल के आगमन से ठीक एक दिन पहले भारी हंगामा देखने को मिला। वेतन और पेंशन भुगतान की मांग को लेकर कर्मचारियों और पेंशनधारियों ने मुख्य द्वार पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बेनीपुर से जदयू विधायक विनय कुमार चौधरी और पूर्व विधान पार्षद डॉ. दिलीप कुमार चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधि भी धरने में शामिल हो गए। स्थिति उस समय गंभीर हो गई जब प्रदर्शन के दौरान एक पेंशनधारी ने आत्मदाह का प्रयास किया, हालांकि मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत हस्तक्षेप कर उसे रोक लिया और बड़ा हादसा टल गया।
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कर्मचारियों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा वेतन और पेंशन का भुगतान जानबूझकर रोका जा रहा है, जबकि सरकार द्वारा इसके लिए लगभग 178 करोड़ रुपये का आवंटन पहले ही किया जा चुका है। उनका कहना है कि पेंशन भुगतान को लेकर पहले हुई बैठकों में निर्णय भी लिया गया था, इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया।

इसी बीच सीनेट की बैठक में शामिल होने पहुंचे जदयू विधायक विनय कुमार चौधरी, पूर्व एमएलसी दिलीप झा सहित कई सदस्य भी कर्मचारियों के विरोध के कारण मुख्य द्वार पर रोक दिए गए। बाद में सभी जनप्रतिनिधि भी प्रदर्शन में शामिल होकर धरने पर बैठ गए। इस दौरान कुलपति लक्ष्मी निवास पांडेय के खिलाफ भ्रष्टाचार और जातिवाद के गंभीर आरोप लगाए गए और तीखी बहस भी हुई।
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लगातार बढ़ते तनाव और विरोध के चलते सिण्डिकेट की बैठक बाधित हो गई और अंततः उसे टाल दिया गया। प्रदर्शन के कारण विश्वविद्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। गौरतलब है कि, बुधवार को बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन सीनेट की बैठक में शामिल होने के लिए दरभंगा आने वाले हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय में बनी मौजूदा स्थिति प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। अब सभी की नजरें राज्यपाल के दौरे पर टिकी हैं कि हालात कैसे संभाले जाते हैं और इस विवाद का क्या समाधान निकलता है।

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विधायक विनय कुमार चौधरी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा 178 करोड़ रुपये का आवंटन होने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन वेतन और पेंशन का भुगतान नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि पेंशन और वेतन भुगतान होने तक वे किसी भी बैठक में शामिल नहीं होंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह शायद देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय है जहां छात्रों को परिणाम आने के बाद भी अंकपत्र नहीं दिया जाता। यूजीसी से नियुक्त शिक्षकों को भी पिछले 20 महीनों से वेतन नहीं मिला है।
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