विधानसभा चुनाव से ठीक चार दिन पहले केवटी विधानसभा क्षेत्र के नयागांव पश्चिमी पंचायत के वार्ड संख्या 7 में मतदाताओं ने वोट बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। करीब 800 मतदाताओं वाले इस वार्ड में ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जब तक सड़क और नाले का निर्माण नहीं होगा, वे वोट नहीं डालेंगे। इस घोषणा के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
शनिवार को वार्ड नंबर 7 के सैकड़ों ग्रामीणों ने मुख्य सड़क के मुहाने पर बैनर लगाकर नारेबाजी की और कहा, “रोड-नाला नहीं तो वोट नहीं।” ग्रामीणों का कहना है कि नयागांव बैंक चौक से मुस्लिम टोल मस्जिद तक सड़क और नाले का निर्माण वर्षों से नहीं हुआ है। इसी वजह से पूरे इलाके में जलजमाव की गंभीर समस्या बनी रहती है। ग्रामीणों ने बताया कि सुखाड़ के मौसम में भी सड़कों और घरों के सामने पानी जमा रहता है। बरसात में हालात और भी खराब हो जाते हैं। बच्चों और महिलाओं के पैरों में सूजन, संक्रमण और त्वचा रोग जैसी दिक्कतें बढ़ गई हैं।
करीब 200 परिवारों वाले इस वार्ड में मुस्लिम, तेली और पासवान समुदाय के लोग रहते हैं। सभी समुदायों ने मिलकर एकजुट होकर मतदान बहिष्कार का निर्णय लिया है। ग्रामीणों ने यहां तक कहा है कि जब तक सड़क और नाले का निर्माण शुरू नहीं होगा, तब तक कोई भी नेता वोट मांगने के लिए वार्ड में प्रवेश नहीं कर पाएगा। गुस्साए ग्रामीणों ने नयागांव स्टेट बैंक के पास सड़क किनारे बैनर लगाकर पूर्व विधायक, वर्तमान विधायक और सांसद को वार्ड में घुसने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा, “वोट मांगने वाले किसी भी नेता को अब वार्ड में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।”
इस आंदोलन की अगुवाई शत्रुघ्न शाह कर रहे हैं। उनके साथ जीतन पासवान, दिनेश पासवान, नथुनी साह, इफ्तेखार, हेमा देवी, भोगेंद्र साहू, अंगूरी खातून, दीपक पासवान, अशोक कुमार शाह, आनंद लाल साह, मोहम्मद सलमान, फुलझरिया देवी और रीना कुमारी समेत बड़ी संख्या में महिला-पुरुष शामिल हैं। इस मामले पर बीडीओ चंद्रमोहन पासवान ने बताया कि उन्हें ग्रामीणों के इस निर्णय की जानकारी मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक टीम गांव जाकर लोगों से संवाद करेगी और उन्हें मतदान के लिए प्रेरित करने की कोशिश करेगी। बीडीओ ने यह भी बताया कि सड़क निर्माण की स्वीकृति मिल चुकी है और चुनाव के बाद कार्य शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल वार्ड संख्या 7 में “रोड-नाला नहीं तो वोट नहीं” के नारे से माहौल गर्म है। ग्रामीणों का यह आंदोलन स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है, और पूरा इलाका इस मुद्दे को लेकर चर्चा में है।