सुशील कुमार मोदी ने दरभंगा एम्स को लेकर यह लेटर दिखाया है।
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बिहार की नीतीश कुमार सरकार और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के बीच धींगामुश्ती के लिए एक और मुद्दा सामने आ गया है। इस बार यह मुद्दा भाजपा के राज्यसभा सांसद और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने सामने लाया है। उन्होंने एक चिट्ठी सामने की है, जो 26 मई 2023 को स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के नाम है। केंद्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य कल्याण मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण की ओर से जारी चिट्ठी में पांच बिंदुओं में कारण बताते हुए स्पष्ट लिखा गया है कि "एकमी शोभन बाइपास पर जो जमीन राज्य सरकार ने दी है, वहां एम्स का निर्माण नहीं हो सकता है। राज्य सरकार दूसरी जमीन सुझाए।" हद यह है कि राज्य सरकार ने अबतक ऐसी कोई चिट्ठी मिलने की सूचना नहीं दी है और साइट पर जमीन समतलीकरण का काम चल रहा है।
पहले टेंडर, फिर राशि स्वीकृत, काम शुरू और अब...
यह मुद्दा इसलिए बड़ा होगा, क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कैबिनेट ने 18 अप्रैल को दरभंगा में प्रस्तावित एम्स की इस जमीन के समतलीकरण के लिए
309 करोड़ 29 लाख 59 हजार रुपये खर्च करने की स्वीकृति दी थी और काम में तेजी के लिए इस स्वीकृति से पहले ही 309 करोड़ का टेंडर निकाला जा चुका था। मिट्टी भराई का काम चलने के दौरान अब यह चिट्ठी सामने आई है। इस चिट्ठी में नीतीश कैबिनेट के फैसले के बाद 27 अप्रैल 2023 को एक टीम के स्थल निरीक्षण का जिक्र है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने उक्त जमीन को एम्स के लिए उचित नहीं माना है।
राज्य सरकार ने नहीं बताया, अगर आई है तो हंगामा तय
राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने दरभंगा में भाजपा की ओर से आयोजित व्यापारी सम्मेलन में इस चिट्ठी का जिक्र किया। रविवार होने के कारण इस चिट्ठी की विश्वसनीयता पर बिहार सरकार से सवाल नहीं पूछा जा सका, लेकिन राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी से 'अमर उजाला’ को हासिल यह चिट्ठी अगर सचमुच राज्य सरकार को मिल चुकी है तो अब खुलकर हंगामा होगा।
पांच बिंदुओं में क्या लिखा है, यह जान लीजिए
एम्स दरभंगा में बने या सहरसा में इसपर हंगामा चल रहा था, इसी बीच राज्य सरकार ने तेजी दिखाते हुए दरभंगा में एम्स के लिए अपनी ओर से सुझाई जगह पर मिट्टी भराई के काम के लिए टेंडर कर दिया था। फिर 18 अप्रैल को इस टेंडर के हिसाब से राशि की स्वीकृति भी दे दी गई। इसके बाद चिट्ठी के अनुसार, 27 अप्रैल को केंद्र की एक टीम ने स्थल निरीक्षण किया तो पाया कि 1. प्रस्तावित जमीन लो लैंड है। शोभन बाइपास के एप्रोच रोड से 7 मीटर नीचे है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हैं, जहां 10 मीटर तक मिट्टी भराई की जरूरत है। 2. 151 एकड़ जमीन में अच्छी क्वालिटी की मिट्टी भराई की चुनौती है। इसके लिए जिस मात्रा में क्वालिटी मिट्टी की जरूरत होगी, वह दरभंगा आसपास में उपलब्ध होने की संभावना नहीं है। यह लंबा समय लेने वाला भी है और इससे लागत भी बढ़ जाएगी। 3. इस स्थल की मिट्टी में दूसरी जगह की मिट्टी भरने से भी धंसने-फूलने का खतरा हा सकता है, जो आगे और भी मुसीबत कर सकता है। 4. इस जमीन की काली मिट्टी पर भराई के बावजूद जमीन का स्तर सुधारने के लिए कई तरह की तकनीकों का इस्तेमाल करना पड़ जाएगा, जिससे लागत बढ़ जाएगी। 5. लो लैंड होने के कारण आगे भी पानी भरने का खतरा रहेगा और नीचे की जमीन से ऊपर की तरफ ड्रेनेज निकालना भी वैज्ञानिक रूप से गलत होगा।