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बिहार न्यूज: दानापुर-बिहटा कॉरिडोर की रफ्तार धीमी, अब अगस्त 2027 तक पूरा होने की उम्मीद

Wed, 09 Sep 2026 03:01 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

पटना से पश्चिमी बिहार की कनेक्टिविटी को बेहतर करने वाली करीब 25 किलोमीटर लंबी दानापुर-बिहटा-कोइलवर एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना तय समय पर पूरी नहीं हो सकेगी।
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दानापुर-बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर में देरी - फोटो : bihar
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विस्तार
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पटना से पश्चिमी बिहार की कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली महत्वाकांक्षी दानापुर-बिहटा-कोइलवर एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना तय समय पर पूरी नहीं हो सकेगी। करीब 25 किलोमीटर लंबी इस महत्वपूर्ण परियोजना का निर्माण कार्य 11 मार्च 2024 को शुरू हुआ था और इसे मूल रूप से सितंबर 2026 तक पूरा किया जाना था। हालांकि, अब उपलब्ध परियोजना अपडेट के मुताबिक इसकी संभावित पूर्णता तिथि 31 अगस्त 2027 बताई जा रही है। इससे पहले जनवरी 2026 में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से जून 2027 तक काम पूरा करने का प्रयास किए जाने की जानकारी दी गई थी।

1969 करोड़ रुपये में हुआ है निर्माण का ठेका

दानापुर-बिहटा-कोइलवर परियोजना की कुल लंबाई 25.081 किलोमीटर है। इसके निर्माण का ठेका करीब 1,969 करोड़ रुपये में सिगॉल इंडिया लिमिटेड–वाईएफसी प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त उपक्रम को दिया गया है।

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परियोजना के तहत दानापुर से बिहटा तक एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। इसमें रैंप का निर्माण भी शामिल है। इसके अलावा बिहटा-कोइलवर खंड में मौजूदा सड़क को फोरलेन करने का काम भी परियोजना का हिस्सा है।

63 फीसदी से ज्यादा निर्माण कार्य पूरा

हालिया परियोजना निगरानी आंकड़ों के अनुसार, कॉरिडोर का करीब 63.5 प्रतिशत भौतिक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। वहीं परियोजना की वित्तीय प्रगति करीब 60.8 प्रतिशत दर्ज की गई है।
इसका मतलब है कि परियोजना का आधे से अधिक निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन अभी भी कई हिस्सों में काम को तेजी देने की चुनौती बनी हुई है। खासकर जिन स्थानों पर जमीन और मौजूदा संरचनाओं से जुड़ी दिक्कतें हैं, वहां निर्माण की रफ्तार प्रभावित हो रही है।

जमीन अधिग्रहण बनी सबसे बड़ी चुनौती

एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण में देरी की प्रमुख वजहों में भूमि अधिग्रहण और रैयती जमीन पर मौजूद संरचनाएं शामिल हैं। बिहटा क्षेत्र के महादेव फुलाड़ी और पतसा मौजा के आसपास जमीन से जुड़े मामलों के कारण परियोजना के कुछ हिस्सों में निर्माण प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई है। रैयती जमीन पर बने स्ट्रक्चर नहीं हटाए जाने की वजह से भी कई जगहों पर काम की गति प्रभावित हुई है। इन बाधाओं के कारण निर्माण एजेंसी को सभी कार्यस्थलों पर एक समान गति से काम करने में परेशानी आ रही है।

दानापुर रेलवे स्टेशन के पास भी अड़चन

दानापुर रेलवे स्टेशन के आसपास रेलवे की जमीन और पुरानी संरचनाओं से जुड़ी बाधाएं भी परियोजना के लिए महत्वपूर्ण चुनौती रही हैं। पहले रेलवे की जमीन का एक हिस्सा NHAI को उपलब्ध कराया गया था। वहीं शेष हिस्से में मौजूद पुरानी संरचनाओं को हटाने की प्रक्रिया चल रही थी। इन अड़चनों के कारण परियोजना के कुछ हिस्सों में निर्माण कार्य को अपेक्षित गति नहीं मिल सकी।

जून 2027 तक पूरा करने की थी कोशिश

जनवरी 2026 में NHAI के परियोजना निदेशक अरविंद कुमार ने बताया था कि परियोजना का करीब 45 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और शेष कार्य को जून 2027 तक पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, अगस्त 2026 तक उपलब्ध परियोजना निगरानी अपडेट में इसकी संभावित पूर्णता तिथि 31 अगस्त 2027 दर्ज की गई है। यानी अब परियोजना के मूल लक्ष्य सितंबर 2026 की तुलना में करीब एक साल की देरी से पूरा होने की संभावना है।

पटना के ट्रैफिक को मिलेगी बड़ी राहत

दानापुर-बिहटा मार्ग वर्तमान में पटना और पश्चिमी बिहार के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इस रास्ते पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे अक्सर यातायात की समस्या सामने आती है। एलिवेटेड कॉरिडोर के चालू होने के बाद मुख्य सड़क पर यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही बिहटा एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। पटना से पश्चिमी बिहार की ओर जाने वाले यात्रियों को भी अपेक्षाकृत तेज और सुगम मार्ग उपलब्ध होने की उम्मीद है।

अब 2027 के नए लक्ष्य पर टिकी निगाहें

दानापुर-बिहटा-कोइलवर एलिवेटेड कॉरिडोर को मूल रूप से सितंबर 2026 तक पूरा किया जाना था, लेकिन निर्माण की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अब इसके 2027 में पूरा होने का लक्ष्य सामने है। ऐसे में प्रशासन और NHAI के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबित भूमि संबंधी मामलों को जल्द सुलझाने और निर्माण एजेंसी को उपलब्ध कार्यस्थलों पर तेजी से काम कराने की है। आने वाले महीनों में निर्माण की रफ्तार यह तय करेगी कि करीब दो हजार करोड़ रुपये की यह महत्वपूर्ण परियोजना 2027 में वास्तव में कब तक जनता के लिए खोली जा सकेगी।

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