बिहार में दिमागी बुखार के कारण 128 बच्चों की मौत हो चुकी है
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प्रेस वार्ता के दौरान सोते नजर आए अश्विनी कुमार चौबे
दिमागी बुखार जैसे संवेदनशील मुद्दे पर हो रही प्रेस वार्ता के दौरान रविवार को केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे सोते हुए नजर आए। इस पर जदयू ने ट्वीट करते हुए लिथा था, '200 बच्चों की जान जाने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की प्रेस वार्ता हो रही है। वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे सो रहे हैं। जाने इनकी मानवीय संवेदना कहां मर गईं?' हालांकि अपना बचाव करते हुए मंत्री का कहना है कि मैं मनन- चिंतन भी करता हूं, सो नहीं रहा था।
राज्य सरकार को देंगे हर संभव मदद
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने बिहार में एईएस के बढ़ते प्रकोप पर कहा, 'हमने राज्य सरकार को सहर संभव सहायता देने का वादा किया है। हर हर घंटे परिस्थिति की निगरानी कर रहे हैं।' इससे पहले सोमवार को उन्होंने इस मामले पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया था। संसद भवन में शपथ लेने के बाद जब उनसे बिहार मामले पर पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'नहीं-नहीं कोई बाइट नहीं दूंगा आज।
अस्पताल देरी से आ रहे हैं मरीज
बिहार के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने कहा, 'मुख्यमंत्री ने कुछ निर्देश दिए हैं। मौत का मुख्य कारण यह है कि मरीज अस्पताल काफी देरी से आ रहे हैं। मरीजों को अस्पतालों आने के लिए कोई खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। सरकार उनके खर्च की प्रतिपूर्ति कर देगी। हर परिवार को अस्पताल आने पर 400 रुपये दिए जा रहे हैं। लोगों में जागरूकता पैदा की जा रही है ताकि बच्चे भूखे पेट न सोएं और बीमार पड़ने पर उन्हें तुरंत अस्पताल लाया जाए। हमने निर्देश दिए हैं कि सभी आशा कार्यकर्ता, एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सभी घरों में ओआरएस का घोल बांटे और उन्हें इनकी महत्ता बताएं।'