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बिहार: सीबीआई ने कोर्ट को बताया, ठाकुर के डर की वजह से पड़ोसियों ने अनसुनी की लड़कियों की चीखें

Fri, 21 Sep 2018 11:38 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
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ब्रजेश ठाकुर
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बिहार के मुजफ्फरपुर के बाल गृह में बच्चियों के साथ हुए यौन शोषण ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इस मामले की जांच कर रहे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। रिपोर्ट में सीबीआई का कहना है कि पड़ोस में रहने वाले लोगों को संभवत: इस अपराध के बारे में पता था लेकिन उन्होंने एनजीओ के संचालक ब्रजेश ठाकुर के आतंक की वजह से कुछ नहीं बोला।

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जस्टिस एमबी लोकुर और दीपक गुप्ता की बेंच ने सीबीआई की प्रगति रिपोर्ट को ध्यान से पढ़ा और उसके खुलासे को नोट किया। इसके बाद बेंच ने अपने आदेश में सीबीआई को आदेश दिया है कि वह ठाकुर के पिछले कामों, संपर्क और प्रभाव को देखें। 

आदेश में कोर्ट ने कहा, 'ऐसा लगता है कि ब्रजेश ठाकुर, सेवा संकल्प एवं विकास समिति एनजीओ का संचालक बहुत प्रभावशाली व्यक्ति है और उसके पड़ोस में रहने वाले लोग उससे डरते हैं और इसी वजह से उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने में अक्षम रहे। असल में यह बात सामने आई है कि लोगों ने शेल्टर होम की लड़कियों की चीखें सुनीं लेकिन इसे किसी के संज्ञान में लेकर नहीं आए क्योंकि वह ब्रजेश ठाकुर से डरते थे।'
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सीबीआई द्वारा बताया गया है कि बिहार की पूर्व सामाजिक कल्याण मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा के पास से बहुत बड़ी संख्या में हथियार और गोलाबारूद बरामद हुए थे। इसकी वजह से कोर्ट ने बिहार पुलिस को दंपत्ति की जांच करने का आदेश दिया है। मंजू वर्मा को पद से इस बात का खुलासा होने के बाद इस्तीफा देना पड़ा था कि उनके पति ने जनवरी से जून के बीच ठाकुर से 17 बार फोन पर बात की थी।

ठाकुर और एनजीओ की संपत्तियों की पता लगाने के लिए कोर्ट ने आयकर विभाग को निर्देश दिए हैं। चूंकि यह बात सामने आई है कि एक दशक के दौरान एनजीओ को कथित तौर पर बिहार सरकार से 4.5 करोड़ रुपये मिले हैं। यह भी सामने आया है कि इस अवधि के दौरान एनजीओ ने 35 वाहन खरीदे। वहीं ठाकुर की पूंजी के बारे में साफतौर से कुछ मालूम नहीं है।

सीबीआई को बिहार सामाजिक कल्याण विभाग के रिकॉर्ड को सीज करने और उन आठ लड़कियों की जांच करने के आदेश दिए गए हैं जिन्हें टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसिज के ऑडिट में कथित यौन शोषण के खुलासे के बाद इस साल मई में हस्तांतरित किया गया था। रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया था कि आखिर लड़कियों को हस्तांतरित क्यों किया गया। बता दें कि मेडिकल परीक्षण में 42 में से 34 लड़कियों के साथ यौन शोषण की पुष्टि हुई थी।

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