इसी बीच सोमवार को संसद भवन से बाहर निकले हर्षवर्धन से जब पत्रकारों ने बिहार में दिमागी बुखार के कारण बढ़ते मौत के आंकड़ों को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि नहीं, नहीं आज मैं कोई बाइट नहीं दूंगा। यह कहते हुए वह सीधे अपनी कार की तरफ गए और उसमें बैठकर रवाना हो गए।
बता दें कि बिहार के एसकेएमसीएच और केजरीवाल अस्पताल में रोजाना दिमागी बुखार से पीड़ित बच्चों के आने का सिलसिला जारी है। इस बुखार के कारण सबसे ज्यादा मौतें मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच अस्पताल में ही हुई हैं। इस बुखार पर रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।
वहीं, भाजपा नेता डॉ. सीपी ठाकुर ने एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम के कारण हुई मौत के मुद्दे पर बिहार सरकार और सीएम नीतीश कुमार पर सवाल उठाए हैं। अपनी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि सरकार को बिमारी के इस प्रकोप पर समय रहते ही सक्रिय मोड में आना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए और अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी बीमारियां लोगों को प्रभावित न करें। उन्होंने कहा कि यदि लीची के सेवन के कारण ऐसा हुआ है तो उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए।