देश से भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने को लेकर यूपीए सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा कि मजबूत लोकपाल बिल लाने में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर विश्वास नहीं कर सकते।
हजारे ने कहा, ‘पीएम और सोनिया गांधी दोनों ही इस बात को लेकर विश्वास नहीं किया जा सकता कि वह भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए मजबूत लोकपाल बिल लाएंगे। अगर वह सच में ही इतने प्रतिबद्ध होते, तो पिछले दो साल में इस मुद्दे पर कुछ मजबूत फैसले लिए जाते।’
कैबिनेट द्वारा पास किए गए लोकपाल बिल को एक स्वांग बताते हुए अन्ना ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष को जवाबी पत्र लिखते हुए पूछा था कि क्या प्रस्तावित बिल मजबूत है या नहीं और सीबीआई व सीवीसी जैसी संस्थाओं को सरकार के नियंत्रण से अलग रखा गया है या नहीं। मगर उन्होंने इस पत्र का कोई जवाब नहीं दिया। अन्ना ने कहा कि सरकार लोगों को बेवकूफ बनाने में लगी हुई है। अगर सरकार कमजोर लोकपाल बिल लाने का प्रयास करेगी, तो हम उनके खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
पटना में ‘जनतंत्र मोर्चा’ आयोजित करने वाले अन्ना ने कहा कि सिस्टम को बदलने के लिए देश भर में भ्रमण करेंगे। वह आंध्र प्रदेश और कर्नाटक समेत चार राज्यों में आम सभाओं का आयोजन करेंगे। पिछले कुछ समय में मुंबई में बिहारियों पर हुए हमलों के बारे में उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं की निंदा करनी चाहिए और उन्होंने कभी भी बिहारी-विरोधी अभियान को समर्थन नहीं दिया।
मोदी की क्षमता पर उठाए सवाल
अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर सवाल उठाते हुए कहा कि मोदी भ्रष्टाचार को खत्म करने के मामले में गंभीर नहीं हैं। उन्होंने अपने राज्य में कठोर लोकायुक्त कानून भी नहीं बनाया है।
अन्ना ने कहा, ‘मैं मोदी से सवाल पूछना चाहता हूं कि आखिर क्यों वह आज तक गुजरात को भ्रष्टाचार मुक्त नहीं बना सके हैं? क्यों वह कठोर लोकायुक्त बिल नहीं लाए? गुजरात के बारे में भ्रष्टाचार की इतनी सारी क्यों शिकायतें आ रही हैं? इसका मतलब है कि मोदी को भ्रष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण करने की इच्छा नहीं है।’
संभावित पीएम के बारे में अन्ना ने कहा कि कोई भी प्रधानमंत्री बन सकता है, इससे क्या फर्क पड़ जाएगा? इस देश ने पिछले 65 वर्षों में बहुत से पीएम देखे हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।