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Bihar Caste Census started: ...एक कमरे में घुसने की ऐसी जद्दोजहद क्यों हो रही जान लीजिए

Sat, 07 Jan 2023 05:37 PM IST
कुमार जितेंद्र ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भागलपुर

सार

शनिवार से बिहार में जातिगत जनगणना के तहत मकानों की गिनती से पहले चरण की शुरुआत हुई। इस शुरुआत की बेहद अनूठी तस्वीर 'अमर उजाला’ की टीम भागलपुर से ला रही है। ऐसी तस्वीर जहां एक कमरे में घुसने के लिए दर्जनों महिलाएं जद्दोजहद कर रहीं।

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भागलपुर में कुछ इस तरह गुजरा जाति जनगणना की शुरुआत में मकान गणना का पहला दिन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शनिवार से बिहार में जातिगत जनगणना के तहत मकानों की गिनती से पहले चरण की शुरुआत हुई। इस शुरुआत की बेहद अनूठी तस्वीर 'अमर उजाला’ की टीम भागलपुर से ला रही है। ऐसी तस्वीर जहां एक कमरे में घुसने के लिए दर्जनों महिलाएं जद्दोजहद कर रहीं। महिलाओं की इस जद्दोजहद को देख उस भीड़ में पुरुष घुसने को तैयार नहीं। अंदर तिल रखने की जगह नहीं...यह बाहर वाले सिर्फ बोल रहे हैं। देखने की हिम्मत नहीं कर पा रहे। गुस्से में कह रहे- एक आदमी अगर पांच हजार प्रगणक को मैटेरियल बांटेगा तो कौन-क्या ले सकेगा और क्या समझेगा!

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जो कमरे के अंदर घुसने की हिम्मत नहीं जुटा सकीं, बाहर ही खड़ी रहीं। - फोटो : अमर उजाला
सरकारी जिद का हश्र दिख रहा
जातिगत जनगणना की तैयारी ठीक से किए बगैर ही आननफानन में शुरुआत कर दी गई। नतीजा यह है कि पटना में भले ही औपचारिक रूप से अच्छी शुरुआत दिख गई और समाधान यात्रा में निकले मुख्यमंत्री को भी उनके आसपास सब अच्छा लगा, लेकिन ऐसा सचमुच है नहीं। बिहार के महत्वपूर्ण शहर भागलपुर में नगर निगम कार्यालय में शनिवार दोपहर करीब दो बजे गणना कर्मियों, यानी प्रगणकों की हालत को देखकर तो यह लिखना ही पड़ेगा। जातिगत जनगणना के लिए सामग्री लेने के लिए एक कमरे में घुसने की जद्दोजहद ऐसी कि इस कड़ाके की ठंड में पसीना छूट रहा। जो जंग जैसी इस स्थिति से लड़कर सामग्री लेते हुए बाहर निकले, वह समझ नहीं पा रहे कि करेंगे क्या इसका? झोले से एक हार्ड बोर्ड और पेन-मार्कर निकालकर दिखाते वार्ड 8 के प्रणक विनय कुमार कहते हैं- “किसी तरह यह सामग्री मिली है। इतने के लिए इतना उठापटक झेलना पड़ा और वह इसलिए क्योंकि तैयारी नहीं थी और हमें ड्यूटी पर बुला लिया गया। जिन्हें हमारा सुपरिटेंडेंट बनाया गया, उन्हें ही एरिया नहीं पता। हमें बताना तो बहुत दूर की बात है। उनसे मिलकर बात करना भी  तीर मार लेना जैसा है। यह किसी एक सुपरिटेंडेंट की हालत नहीं और न ही कोई 10-20 प्रगणक परेशान हैं। सभी जूझ रहे हैं।” 
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जातिगत जनगणना के पहले दिन सामग्री का हाल दिखाते प्रगणक। - फोटो : अमर उजाला
हाजिरी बनी, सामग्री लेना ही जंग जीतने जैसा
मंसूरगंज से आए अनिल श्रीवास्तव ने कहा- “ऑफिस में घुसना तो जंग जीतने के बराबर है। हाजिरी बन गई, लेकिन गणना तो ऐसे शुरू ही नहीं हो सकती। 15 में से एक दिन तो यूं ही बर्बाद हो गया। पांच हजार आदमी को एक आदमी कैसे पेपर बांट सकता है। कांउटर लगाना चाहिए था। और, यह सब हो भी जाए तो प्रगणक को उसका कार्यक्षेत्र कैसे पता चलेगा?” 
कौन कहां से कहां तक मकान गिनेगा, पता नहीं
सामग्री के साथ बड़ा संकट क्षेत्र बंटवारे का भी नजर आया। नाथनगर से सामग्री और क्षेत्र की जानकारी लेने आए वीर प्रकाश सिंह बताने लगे कि ट्रेनिंग भी आधी-अधूरी दी और अब कहने को शुरुआत भी हो गई गणना की। जबकि, हकीकत यह है कि कोई प्रगणक किस मकान से गणना शुरू करते हुए कहां तक जाएगा, इसकी जानकारी देने वाला कोई नहीं। नक्शा होना चाहिए था या कुछ ऐसा, जिससे सबकुछ साफ रहे। लेकिन, पहले तो यहां प्रगणक को मिलने वाली सामग्री की मारामारी है। उससे निकलें तो आगे सोचें।
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