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बिहार: किला मैदान में सजा आस्था और संस्कृति का मंच, बक्सर की ऐतिहासिक रामलीला का हुआ शुभारंभ

Mon, 05 Oct 2026 03:16 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बक्सर

सार

बक्सर में 1941 से चली आ रही रामलीला परंपरा के तहत 20 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव का शुभारंभ हुआ। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने आयोजन की सराहना की। पहले दिन ‘नारद मोह लीला’ का मंचन हुआ, जिसने दर्शकों को भक्ति और विनम्रता का संदेश दिया।
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शिक्षा मंत्री - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आजादी से पहले वर्ष 1941 से चली आ रही बक्सर की गौरवशाली रामलीला परंपरा एक बार फिर जीवंत हो उठी। ऐतिहासिक किला मैदान स्थित रामलीला मंच पर रविवार देर शाम श्री रामलीला समिति, बक्सर के तत्वावधान में 20 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव का वैदिक मंत्रोच्चार और मंगलाचरण के बीच भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन के साथ ही पूरा परिसर धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक रंग में सराबोर हो गया।

लक्ष्मी नारायण मंदिर के पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य महंत श्री राजगोपालाचार्य ‘त्यागी जी’ महाराज ने विधिवत पूजा-अर्चना और आशीर्वचन के साथ महोत्सव का उद्घाटन किया। पूजन कार्य पंडित छविनाथ त्रिपाठी, संजय शास्त्री और मनोज मिश्रा सहित विद्वानों ने संपन्न कराया। समिति के अध्यक्ष रमेश गोयल यजमान रहे। विभिन्न मंदिरों से पहुंचे वेदपाठी ब्रह्मचारियों ने वैदिक अनुष्ठान में सहयोग किया।

समारोह में मुख्य अतिथि बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, विशिष्ट अतिथि विधान पार्षद जीवन कुमार और नगर परिषद की मुख्य पार्षद कमरून निशा मौजूद रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष रमेश गोयल ने की। संचालन कोषाध्यक्ष सह प्रवक्ता सुरेश संगम ने किया। सचिव बैकुंठनाथ शर्मा ने स्वागत भाषण दिया, जबकि संयुक्त सचिव सह मीडिया प्रभारी हरिशंकर गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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‘जहां भगवान राम ने लीला की, वहां रामलीला नहीं होगी तो कहां होगी’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने रामलीला को बक्सर की सांस्कृतिक पहचान बताया। उन्होंने आयोजन समिति और रामलीला मंडली की सराहना करते हुए कहा कि आज भी इस कला को जीवित रखना गौरव की बात है। उन्होंने कहा, “जहां भगवान राम ने लीला की, वहां रामलीला नहीं होगी तो कहां होगी। भगवान राम अपनी लीला करने के लिए बक्सर में ही आए थे।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि बक्सर में रामलीला का आयोजन और बेहतर तरीके से होना चाहिए। इसके लिए वह हर वर्ष अपनी ओर से हरसंभव सहयोग करेंगे। उन्होंने श्री रामलीला आयोजन समिति को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह बहुत बड़ा आयोजन है और इसे निरंतर जारी रहना चाहिए। इसमें समाज के सभी लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आजादी से पहले से लगातार आयोजित हो रही रामलीला बक्सर की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत है। इस परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। रामलीला भगवान श्रीराम के आदर्श, मर्यादा, त्याग, सत्य और धर्म का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।

रामलीला और कृष्ण लीला संस्कारों की जीवंत परंपरा
स्वामी राजगोपालाचार्य ‘त्यागी जी’ महाराज ने कहा कि बक्सर की पावन धरती भगवान श्रीराम की स्मृतियों से जुड़ी है। यहां की रामलीला और कृष्ण लीला सनातन संस्कृति, भक्ति और संस्कारों की जीवंत परंपरा हैं। इन लीलाओं का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को सद्मार्ग की ओर प्रेरित करना है। उन्होंने समिति को परंपरा के संरक्षण के लिए साधुवाद देते हुए महोत्सव की सफलता की मंगलकामना की।

नगर परिषद की मुख्य पार्षद कमरून निशा ने कहा कि बक्सर की रामलीला धार्मिक आस्था के साथ नगर की सांस्कृतिक पहचान भी है। उन्होंने समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए नगर परिषद की ओर से यथासंभव सहयोग का आश्वासन दिया। सचिव बैकुंठनाथ शर्मा ने कहा कि समिति इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत को निरंतर भव्य और व्यवस्थित स्वरूप प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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‘नारद मोह लीला’ ने बांधा समां
महोत्सव के पहले दिन वृंदावन से पहुंचे श्री बालकृष्ण रासलीला रामलीला मंडल के स्वामी एवं निर्देशक मोहन श्याम भारद्वाज के निर्देशन में गणेश पूजन, श्रीराम-जानकी पूजन और आरती के बाद ‘नारद मोह लीला’ का भावपूर्ण मंचन किया गया।

लीला में देवर्षि नारद के तप और भक्ति से उत्पन्न अहंकार तथा भगवान विष्णु की लीला के माध्यम से उनके मोहभंग और आत्मबोध को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रसंग के माध्यम से दर्शकों को अहंकार त्याग, विनम्रता और भक्ति का संदेश दिया गया। लीला के दौरान पूरा पंडाल धार्मिक जयकारों से गूंजता रहा।

कार्यक्रम में दक्षिण बिहार प्रांत कार्यवाह राजेन्द्र प्रसाद, गंगा समग्र दक्षिण बिहार प्रांत संयोजक शंभुनाथ पाण्डेय, समिति के रोहतास गोयल, कृष्णा वर्मा, उदय सर्राफ ‘जोखन’, सुशील मानसिंहका, निर्मल कुमार गुप्ता, प्रियेश कुमार प्रिंस, सुमित मानसिंहका, पंकज मानसिंहका, चिरंजीलाल चौधरी, ब्रजमोहन सेठ, राजेश चौरसिया, राजकुमार गुप्ता, बासुकीनाथ सिंह, नारायण राय, दिनेश सिंह, मदन जी दूबे, राकेश राय और शशिकांत चौधरी सहित समिति के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजसेवी, साहित्यकार, व्यवसायी, जनप्रतिनिधि तथा राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग भी शामिल हुए।

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