बिहार के प्रसिद्ध सामाजिक उद्यमी और भारतीय युवा आइकॉन शरद विवेक सागर।
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यह व्यक्ति का नहीं एक विचार का सम्मान है
मानद उपाधि प्राप्त करते हुए शरद सागर ने कहा कि डॉ. माशेलकर के साथ यह सम्मान पाकर मैं अभिभूत हूं। उनका और मेरा जन्म आधी सदी के अंतर पर हुआ। मैं उनकी विशाल छाया में खड़ा हूं और यह सम्मान प्राप्त कर रहा हूं। मैं हृदय की गहराई से मानता हूँ कि यह एक व्यक्ति का सम्मान नहीं है। यह एक विचार का सम्मान है - जिसे लेकर मैंने 16 वर्ष की आयु में डेक्सटेरिटी ग्लोबल की स्थापना की - यह विचार कि प्रतिभा समान रूप से वितरित है लेकिन अवसर नहीं। हमारे देश में कहीं भी कोई भी बच्चा, अगर सही उम्र और मंच पर शैक्षिक अवसर और प्रशिक्षण पाए तो वह भी गांधी और अंबेडकर, विक्रम साराभाई और वर्गीस कुरियन और हमारे अपने डॉ. माशेलकर की तरह ही हमारे राष्ट्रीय जीवन में योगदान दे सकता है। प्रत्येक बच्चे को अपने शैक्षणिक जीवन को भारत के राष्ट्रीय जीवन के साथ, अपनी शैक्षणिक यात्रा को भारत की राष्ट्रीय यात्रा के साथ जोड़ने का अवसर मिलना चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने किया था आमंत्रित
16 वर्ष की आयु में शरद सागर ने राष्ट्रीय संगठन डेक्सटेरिटी ग्लोबल की स्थापना की। 24 वर्ष की आयु में फोर्ब्स ने उन्हें विश्व के 30 सबसे प्रभावशाली युवाओं की सूची में शामिल किया। 2016 में सागर राष्ट्रीय एवं वैश्विक खबरों में रहे जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें को व्हाइट हाउस की एक विशेष सभा में एकमात्र भारतीय के रूप में आमंत्रित किया। सागर भारत के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति में सबसे कम उम्र के और सबसे ज्यादा आमंत्रित विशेषज्ञों में से एक हैं। 2017 में 25 वर्ष की आयु में सागर किसी विश्वविद्यालय के मुख्य अतिथि और दीक्षांत वक्ता के रूप में आमंत्रित होने वाले सबसे युवा भारतीय बने।
21वीं सदी के विवेकानंद की मिली उपाधि
संगठनात्मक नेतृत्व के अतिरिक्त शरद सागर को अंग्रेजी एवं हिंदी के फायरब्रांड वक्ता के रूप में जाना जाता है। एक औसत वर्ष में शरद सागर 20 से अधिक राज्यों में 250 से अधिक प्रमुख सार्वजनिक भाषण देते हैं। उन्हें भारत और दुनिया भर के प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा शिक्षा, नेतृत्व, उद्यमशीलता और राष्ट्र-निर्माण पर व्याख्यान देने के लिए अक्सर आमंत्रित किया जाता है। वडोदरा के विवेकानन्द मेमोरियल हॉल में एक प्रेरक भाषण के पश्चात एक प्रमुख भारतीय मीडिया हाउस ने सागर को "21वीं सदी के विवेकानंद" की उपाधि दी।