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कल जेल से बाहर आएगा कुख्यात शाहबुद्दीन, तेजाब से नहलाकर करवा दी थी सगे भाइयों की हत्या

Fri, 09 Sep 2016 05:24 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : shahbuddin
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बिहार में कभी आतंक का पर्याय रहा कुख्यात बाहुबली मो. शहाबुद्दीन कल भागलपुर जेल से बाहर आ जाएगा। दो भाइयों की तेजाब से नहलाकर हत्या करने और बाद में हत्याकांड के इकलौते गवाह उनके तीसरे भाई की हत्या के मामले में शहाबुद्दीन भागलपुर जेल में बंद था।
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दोहरे हत्याकांड में हाईकोर्ट उसे फरवरी में ही जमानत दे चुकी थी जबकि गवाह की हत्या के मामले में भी बुधवार को शीर्ष अदालत ने उसकी जमानत मंजूर कर ली। वहीं शहाबुद्दीन की जमानत के बाद बिहार की राजनीति गर्म हो गई है, सत्तारूढ़ दल ने जहां मामले में चुप्पी साध ली है वहीं विपक्षी भाजपा ने आरोप लगाया है कि लालू यादव से नजदीकी के चलते सरकार ने उसका केस कमजोर कर दिया, जिसकी वजह से उसे जमानत मिल गई। 

दूसरी ओर शहाबुद्दीन के जेल से छूटने के बाद जोरदार स्वागत के लिए उसके समर्थकों ने जोरदार तैयारियां की हैं। माना जा रहा है एक हजार से ज्यादा गाड़ियों के काफिले के साथ उसे जेल से लाया जाएगा। 
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असल में राज्य में राजद और जेडीयू की सरकार आने के बाद से ही शहाबुद्दीन के प्रति सरकार का रुख नरम हो गया था। राजद सुप्रीमो लालू यादव से तो उनकी नजदीकियों ऐसी बढ़ी कि उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव और समिति में कार्यकारी सदस्य भी बना दिया गया था। 

दो भाइयों की हत्या के मामले में मिल चुकी है उम्रकैद की सजा

फरवरी में तो लालू यादव की पार्टी के दो मंत्रियों के सीवान जेल में शहाबुद्दीन के साथ मिठाई खाने की तस्वीरें भी बाहर आ गई थी। इसके बाद भी सरकार पर शहाबुद्दीन को शह देने के आरोप लगे थे। बाद में पत्रकार राजदेव रंजन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। तब भी आरोप लगे थे कि शहाबुद्दीन ने तस्वीरें लीक करने के शक में राजदेव की हत्या करवा दी है।

पुलिस ने इस मामले में शहाबुद्दीन को भी आरोपी बनाया था जिसके बाद उनका तबादला सीवान जेल से भागलपुर जेल में कर दिया गया था। कभी बिहार की जरायम की दुनिया में सबसे कुख्यात नाम रहे शहाबुद्दीन पर हत्या, अपहरण और रंगदारी जैसे संगीन अपराधों के दर्जनों मामले दर्ज हैं। जिनमें से उसे कई मामलों में निचली अदालत से सजा भी हो चुकी है। 

इन्हीं में से एक मामला था सीवान के जाने माने व्यवसायी चंदा बाबू के दो बेटों सतीश राज और गिरीश राज की हत्या का जिनकी 16 अगस्त 20014 को अपहरण कर तेजाब से नहलाकर बर्बर तरीके से हत्या कर दी गई थी। 

मामले में शहाबुद्दीन सहित आधा दर्जन लोगों के खिलाफ अपहरण और हत्या की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। इस लोमहर्षक हत्याकांड ने बिहार सहित पूरे देश को ‌हिला दिया था और शहाबुद्दीन का नाम पूरे देशभर में चर्चित हो गया था।

नीतीश ने 2005 में भिजवाया था जेल, अब लालू से बढ़ रही थी नजदीकियां

- फोटो : getty images
इस हत्याकांड के बाद से ही बिहार में जंगलराज का शोर मचा था। मामले में बिहार की तत्कालीन सरकार चारों तरफ से घिरी तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शहाबुद्दीन को दिल्‍ली से गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया था। 

तभी से वह जेल में बंद थे। लेकिन इससे पहले की शहाबुद्दीन को इस मामले में कोर्ट से सजा मिल पाती 16 जून 2014 को हत्याकांड के एकमात्र चश्मदीद गवाह सतीश और गिरीश के तीसरे भाई राजीव रोशन की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। 

बताया जाता है कि वह हत्याकांड में गवाही देने कोर्ट जा रहे थे। इसके आरोप भी शाहबुद्दीन पर ही लगे थे। पुलिस ने उन्हें भी आरोपी बनाया था। पिछले साल 11 दिसंबर को दोनों भाइयों की हत्या में सीवान सिविल कोर्ट ने शहाबुद्दीन को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। 

हालांकि 2 मार्च 2016 को उन्हें इस मामले में हाईकोर्ट से जमानत भी मिल गई। असल में बिहार में दोबारा लालू यादव के गठबंधन वाली सरकार आने के बाद से ही इस बात की चर्चा शुरू हो गई थी कि शहाबुद्दीन को लेकर सरकार का रुख नरम हो सकता है। 

इन चर्चाओं को तब बल मिला जब लालू ने उन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण पद भी दिया और उनकी पार्टी के दो मंत्रियों की सीवान जेल में शहाबुद्दीन के साथ मिठाइयां खाने की तस्वीरें बाहर आईं।
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सुशील मोदी का आरोप लालू के चलते कमजोर हुआ केस

- फोटो : PTI
अब गवाह के हत्या के मामले में हाइकोर्ट ने उन्हें जमानत दी तो ये आरोप और पुख्ता हो गए कि सरकार ने जानबूझकर बिहार के सबसे कुख्यात बाहुबली के मामले में नरमी बरती। 

विपक्ष के नेता सुशील मोदी आरोप लगाते हैं कि 3 मार्च 2016 को हाईकोर्ट ने इस बात के निर्देश दिए थे कि छह महीने में पुलिस अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट दाखिल कर दे। लेकिन सरकार की मेहरबानी का आलम ऐसा था कि मामले में उनके खिलाफ सरकार की तरफ से पैरवी करने के लिए सीनियर के बजाय जूनियर वकीलों को लगाया गया और केस को कमजोर कर दिया गया। 

नतीजतन हाईकोर्ट के पास जमानत देने के अलावा कोई चारा नहीं रहा। दूसरी ओर इस बात की संभावना भी कम ही है कि हाईकोर्ट से शहाबुद्दीन को मिली जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी मिल पाएगी। 

क्योंकि सरकार इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाएगी इस बात की तो संभावना कम ही है और मामले के दूसरे वादी तीनों भाइयों के पिता चंदा बाबू का कहना है कि सरकार भी अब उनकी है तो उन्हें सजा कौन दिलवाएगा, और मुझमे इतनी हिम्मत नहीं बची है जो सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ सकूं। इसलिए मैंने अब यह मामला ईश्वर के ऊपर छोड़ दिया है।
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