माना जा रहा है कि बिहार के क्षेत्रीय और जातीय समीकरण को देखते हुए सभी दल जिताऊ सीटों की ही मांग कर रहे हैं। भाजपा ने जदयू को जोड़े रखने के लिए पिछली बार के मुकाबले कम सीटों पर लड़ने पर सहमति जताई है, लेकिन इसके बदले में उसका रणनीतिक प्रबंधन जिताऊ सीटों को अपने कोटे में बनाए रखने का दबाव बनाने की कोशिश करेगा।
भाजपा मुंगेर, दरभंगा, किशनगंज और खगड़िया जैसी सीटें छोड़ना नहीं चाहती है, लेकिन जदयू की निगाह भी इन सीटों पर है। भाजपा से नाराज सांसद कीर्ति आजाद और शत्रुघभन सिन्हा के बगावती तेवरों को लेकर पार्टी का क्या रुख होगा और उनका मुकाबला कौन करेगा, ये भी तय होना है। उधर, जदयू की कोशिश यादव बाहुल्य बेल्ट की मधेपुरा, छपरा, सारन और सीवान जैसी सीटों से दूर रहने की है।
2014 का गणित
22 सीट जीती थीं भाजपा ने पिछली बार
06 सीट जीती थी लोजपा ने और 1 हारी थी
02 सीट जीती थी आरएलएसपी ने 3 में से
02 ही सीट जीत पाई थी जदयू 40 सीटों में से