बिहार में मुख्यमंत्री को लेकर शुक्रवार को होने वाले मतदान से ठीक पहले पटना हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को तकड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने जेडीयू के मांझी खेमे के आठ विधायकों के विधानसभा में मतदान करने पर रोक लगा दी है।
इससे मांझी के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। पार्टी अध्यक्ष शरद यादव ने वोट न करने वाले आठ विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया था। अब बहुमत साबित करने के लिए कुल 113 विधायकों का समर्थन जरूरी है। बिहार विधानसभा में अब विधायकों की संख्या 235 रहेगी। वहीं मांझी ने कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
बीजेपी से छिना मुख्य विपक्षी दल का दर्जा
उधर गुरुवार को विधानसभा स्पीकर उदय नारायण सिंह चौधरी ने संख्या बल के आधार पर जदयू को विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल का दर्जा दे दिया। जदयू के विधायक विजय चौधरी को विपक्षी दल का नेता चुना गया है।
विपक्षी दल का दर्जा छिन जाने से आक्रोशित भाजपा विधायकों ने विधानसभा के बाहर स्पीकर के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान भाजपा विधायकों की सुरक्षा कर्मियों से भी जबरदस्त नौक-झौंक हुई। विधायकों ने यहां रख्रे गमले भी तोड़ दिए।
जदयू ने लगाया विधायक खरीद फरोख्त का आरोप
जदयू ने एक ऑडियो टेप जारी कर बीजेपी और जीतन राम मांझी पर पार्टी के विधायकों को खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया। पटना में प्रेस कांफ्रेस कर जदयू के विधायक शफुद्यीन ने कहा कि उन्हें आरजेडी के पप्पू यादव ने फोन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बात मांझी से और भाजपा विधायकों से भी सपर्क कराने की बात कही गई। शफुद्यीन ने आरोप लगाया कि उन्हें पद और पैसे का भी लालच दिया गया। वहीं आरजेडी सांसद पप्पू यादव ने शर्फुद्यीन के आरोपो का झूठा बताया और कहा कि यह उनके खिलाफ साजिश है। यादव ने कहा कि वह शफुद्यीन को जानते तक नहीं और जदयू की ओर से जारी टेप में उनकी आवाज नहीं हैं।