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बिहार में छात्रों का भविष्य भगवान भरोसे, 3 साल से गायब हैं 500 से ज्यादा टीचर

Tue, 23 May 2017 02:23 PM IST
amarujala.com- presented by: अकरम
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सांकेतिक चित्र
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देश में सरकारी स्कूल एक ओर जहां शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे सरकारी स्कूल भी हैं जिनमें तीन-तीन साल से शिक्षक गायब हैं। पटना जिला प्रशासन ने नगर निकायों द्वारा चलाए जा रहे ऐसे 538 सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्कूल शिक्षकों की पहचान की है, जिन्होंने पिछले तीन से पांच सालों के बीच अपनी ड्यूटी की कोई सूचना नहीं दी।
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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पटना जिला मजिस्ट्रेट संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि रविवार को एक बैठक के बाद प्रशासन ने स्थानीय निकायों के कार्यकारी अधिकारियों को से पूछा है कि इस चूक के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी को भी उनकी लापरवाही के बारे में स्पष्ट करने के लिए कहा गया है। 

हालांकि, छात्रों को पढ़ाने के लिए स्कूल नहीं पहुंच रहे शिक्षकों को सैलरी भी नहीं मिलती। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि ये शिक्षक स्कूल के रजिस्टर्स में मौजूद हैं। जिसकी वजह से स्कूल नए शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर सकते। इस लापरवाही में यह भी गौर करने वाली बात है कि 538 शिक्षकों में से 300 शिक्षकों के इस्तीफे भी स्वीकार नहीं किए गए।
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'पुरनों की वजह से नए शिक्षकों की नियुक्तियां बंद'

सांकेतिक चित्र
इस्तीफे स्वीकार नहीं किए जाने पर संजय कुमार अग्रवाल ने कहा,' इसकी वजह से नए शिक्षकों की नियुक्तियां बंद हो गई हैं। हमें इसमें स्थानीय निकायों की भागीदारी पर संदेह है। ऐसा लगता है कि इन शिक्षकों ने नौकरी में बने रहने के लिए स्थानीय कार्यालयों या स्कूल के प्रिंसिपलों के साथ हेर-फेर की है।

पटना जिला मजिस्ट्रेट ने कहा,'मैं दंग रहा गया जब कुछ साल दूसरी नौकरी पाने की कोशिश में विफल रहा एक व्यक्ति मेरे पास आया और कहने लगा कि वह टीचर के रूप में अपनी नौकरी दोबारा करना चाहता है।'

अग्रवाल ने कहा कि मुझे पता चला है कि कई  कैंडिडेट्स ने शिक्षक के रूप में चयन के बाद भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। उन्होंने कहा,'इनमें से कई शिक्षक ऐसे हैं जो इस्तीफा दे चुके हैं, लेकिन स्थानीय निकायों ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। जिसकी वजह से सरकारी रिकॉर्ड्स में शिक्षको की रिक्तियां नहीं दिखतीं। ' 
 
मजिस्ट्रेट ने कहा कि स्कूलों के निरीक्षण के दौरान हमने पाया कि केवल 50 प्रतिशत शिक्षक स्कूलों में ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करते हैं। लेकिन अब हम इसका कारण जानते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने स्कूलों के प्रिंसिपलों को तीन महीने से ज्यादा गायब रहने वाले शिक्षकों की लिस्ट दो हफ्ते में बनाकर देने का लिए कहा है। अगर कोई स्कूल प्रिंसिपल लिस्ट जमा नहीं करता तो यह माना जाएगा कि वह इसमें शामिल था।
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