‘बनारस वाला इश्क’ फेम बिहार के लेखक प्रभात बांधुल्य ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर आ रहे चुनावी मौसम को लेकर नेताओं की कार्यशैली पर व्यंग्य के रूप में करारा प्रहार किया है। बांधुल्य ने व्यंग्य भरी कविता में नेताओं के गठबंधन, झूठे वादों और वोटरों को पैसे देने की परिपाटी पर चोट की है। प्रभात बांधुल्य के व्यंग्य का शीर्षक ‘नेता-जनता गठबंधन’ है।
बांधुल्य के व्यंग्य का अंदाज कुछ यूं है:-
मौसम चुनावी लगा के बड़ा पोस्टर अभिनंदन हो रहल बा
चुनाव आता बबुआ गठबंधन हो रहल बा
चुनाव आता बबुआ...
बेरोजगारी, महंगाई पे बात न कोई, लेकिन वादा पे वादा लुभावे खातिर होई
चुनाव आता बबुआ....
सुमनी के दुरा पे एक दिन खइहें, बैजू के अपन सवांग बतइहें
और पिछले बार के वादा पे सोनुआ टरटराइ, तो थोड़ा मुस्कुराइ दीहें 500 थमाई
इतने में नेताजी के माहौल बन जाई
चुनाव आता बबुआ....।
लेखनी और वाणी से आए दिन चर्चा में रहते हैं लेखक
प्रभात बांधुल्य बिहार के चर्चित लेखक हैं। उनकी रचनाएं चर्चा में रहती हैं। हाल ही में लेखक की वन साइडेड लवर पिंकी ने उन्हें पाने के लिए खुद को नौकरी देने की मांग करती हुई चिट्ठी उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को लिखी थी। पिंकी की यह चिट्ठी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई थी। हालांकि लेखक ने पिंकी के प्रेम निवेदन को यह कहकर अस्वीकार कर दिया था कि वह पहले से ही अफेयर में हैं। और इससे उनकी प्रेमिका नाराज हो जाएंगी। इसके बावजूद लेखक ने पिंकी को नौकरी दिलाने के लिए पहल करने का भरोसा दिला रखा है। लेकिन पिंकी को अभी नौकरी नहीं मिली है।