सुपौल के वीरपुर अनुमंडलीय अस्पताल में बुधवार की देर रात सड़क दुर्घटना में घायल एक युवक की मौत हो गई। जिसके बाद मृतक के परिजनों ने जम कर हंगामा मचाया और तोड़फोड़ की। हालांकि बाद में प्रशासन की टीम अस्पताल पहुंची और परिजनों को शांत कराया। हंगामा शांत कराने के लिए चार थानों की पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी। इस बीच परिजनों ने वहां ड्यूटी पर तैनात डॉ शैलेंद्र दीपक पर ईलाज के बजाय स्वास्थ्य प्रबंधक के साथ शराब पार्टी का आरोप लगाया। इधर, हंगामे के बीच डॉ शैलेंद्र दीपक भाग कर किसी तरह वीरपुर थाना पहुंच गए। वही मृतक वीरपुर थाना क्षेत्र के बलभद्रपुर वार्ड 6 निवासी 18 वर्षीय मो अरबाज आलम की मां बीबी खातून ने थाने में लिखित शिकायत भी दर्ज कराई है। इधर, वीरपुर एसडीएम नीरज कुमार ने मामले की जांच और कार्रवाई की बात कही है।
टोकने पर गाली गलौज कर उसे भगा दिया
दरअसल, बुधवार की देर शाम बलभद्रपुर वार्ड 6 निवासी मो अरबाज अपने एक मित्र के साथ बाइक से घर लौट रहा था। इसी दौरान एक अज्ञात बाइक से हुई टक्कर में दोनों घायल हो गए। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे परिजनों ने दोनों को ईलाज के लिए वीरपुर अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचाया। परिजनों का आरोप है कि यहां घायलों को देखने के लिए कोई स्वास्थ्यकर्मी तैयार नहीं था। लिखित आवेदन में मृतक की मां ने कहा है कि जब पहली बार वह डॉक्टर के ड्यूटी कक्ष में पहुंची तो वहां मौजूद डॉ शैलेंद्र दीपक अस्पताल प्रबंधक के साथ बैठ कर शराब पी रहे थे। टोकने पर गाली गलौज कर उसे भगा दिया। वही डेढ़ घंटे तक घायल अरबाज को देखने के लिए कोई स्वास्थ्यकर्मी भी नहीं पहुंचा। ऐसे में तबियत बिगड़ती देख जब बीबी खातून दोबारा अपने बेटे की जान बचाने की गुहार लेकर डॉक्टर के पास पहुंची तो उन्होंने बिना किसी जांच के, गुस्से में आ कर एक सुई लगा दी। इसके कुछ मिनटों में ही अरबाज की मौत हो गई। जिसके बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और वे अस्पताल परिसर में हंगामा और तोड़फोड़ करने लगे। परिजनों का कहना था कि अरबाज की मौत के बाद उसे रेफर कर दिया गया। अगर समय रहते रेफर किया जाता तो उसकी जान बच सकती थी। आपको बता दें कि डॉ शैलेंद्र दीपक वीरपुर अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक भी हैं।
हंगामे के बीच फरार हुए डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी
परिजनों के हंगामे के बीच अस्पताल में मौजूद डॉ शैलेंद्र दीपक सहित तमाम स्वास्थ्यकर्मी मौके से फरार हो गए। परिजनों का हंगामा करीब एक घंटे तक चला। इस बीच वीरपुर थाना से एक पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची। जिसमें एक दारोगा और कुछ महिला सिपाही शामिल थे। हालांकि भीड़ के हंगामे के बीच पुलिस टीम भी बेबस नजर आई। बाद में एसडीएम नीरज कुमार, एसडीपीओ सुरेंद्र कुमार, वीरपुर थानाध्यक्ष राजकिशोर मंडल, भीमनगर थानाध्यक्ष दीपक कुमार, रतनपुर थानाध्यक्ष कृष्णा कुमार सिंह, बलुआ थानाध्यक्ष मनीषा चक्रवर्ती सहित तमाम अधिकारी मौके पर पहुंचे। जिसके बाद परिजनों को समझा बुझा कर हंगामा शांत कराया गया।
डॉक्टर बोले- उपाधीक्षक हूं, इसलिए सब फ्रेमिंग किया गया
इधर, वीरपुर अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ शैलेंद्र दीपक ने आरोपों का सिरे से खंडन किया है। उन्होंने कहा कि शराब के आरोपों पर उन्होंने थाना के मशीन से जांच करवाई है। क्योंकि वह उपाधीक्षक हैं, इसलिए यह सबकुछ फ्रेमिंग किया गया है। ड्यूटी में लापरवाही का सवाल ही नहीं उठता है। पूरा परिसर सीसीटीवी कैमरे से लैश है। फुटेज से स्पष्ट हो जाएगा कि जब मरीज डेढ़ दो घंटे तक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती था, तब वह उसी वार्ड में अपनी ड्यूटी पर थे।
सिविल सर्जन बोले- तोड़फोड़ को लेकर होगी एफआईआर
इधर, सिविल सर्जन डॉ ललन कुमार ठाकुर ने बताया कि हंगामे की जानकारी मिली है। मरीज को रेफर किया गया था, लेकिन रास्ते में उसकी मौत के बाद परिजन शव को लेकर दोबारा अस्पताल पहुंचे और तोड़फोड़ की। कई कंप्यूटर सहित अन्य सामान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसको लेकर प्राथमिकी का आदेश दिया गया है। वही लापरवाही के आरोपों के बाबत भी जांच के निर्देश दिए गए हैं।