पर्चा लिखते गुरुशरण शर्मा महाराज।
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प्रतियोगिता हो तो पता चलेगा पर्चा लिखने वाले और पंडोखर सरकार में क्या है अंतर
उन्होंने कहा कि मैं त्रिकालदर्शी नहीं हूं। त्रिकालदर्शी तो पंडोखर सरकार है, जिनकी कृपा से लोग हमें त्रिकालदर्शी समझते है। उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि एक प्रतियोगिता हो ताकि लोग जान सके की तथाकथित पर्चा लिखने और पंडोखर सरकार धाम में क्या अंतर है। मैं कोई भगवान नहीं, भागवत कृपा से जो प्रेरणा मिलती है उसी से मैं कुछ कह पता हूं। आज 140 पर्चियां लिखीं। इसमें से 84 पर्चियां मैं होटल में हीं बांट दिया। उन्होंने कहा कि मैं यहां किसी दल विशेष के लिए नहीं आया हूं।
दरबार के अंतिम सत्र में निकला इनका पर्चा, महाराज ने बताया यह समाधान
वहीं, आज दरबार के अंतिम सत्र में पहली बार आई गोपालगंज की सुनीता देवी का पर्चा निकला। उनके घर पितृ दोष था, साथ हीं बिजनेस नही चल रहा था। महाराज ने समस्या का समाधान बताया। दूसरा पर्चा पटना के शकुंतला देवी निकला, उनके बच्चों की शादी नही हो पा रही थी। महाराज ने उनके भी समस्या का समाधान बताया। तीसरा पर्चा पटना की श्वेता का निकला, जिनकी जमीनी समस्या थी। महाराज ने उपाय बताते हुए कहा कि आपकी समस्या दूर होगी और आपका मकान भी बनेगा। वहीं विजय कुमार सिन्हा की शादी नही हो रही थी। महाराज ने कहा कि होगी और शादी शुदा लड़की से होगी। और उसके उपाय भी बताए इस दौरान उन्होंने कहा कि संत, ब्रह्म, गौ हीं हमारे लिए ही पूजनीय है। प्रमात्मा का स्मरण करो, अपने माता पिता को पूजिए। आपको अपना धर्म अपनाना है आपको अपना संस्कृति को अपनाना है। हवन पूजन अनुष्ठान में किसी भी जाति संप्रदाय का भेद नहीं है, भेद तो केवल पवित्रता का है। संतो की कृपा से, आपलोगो की आस्था से हीं मैं आज यहां बैठा हूं। 100 में 99 फीसदी काम होगा, अगर एक परसेंट नही होता तो मैं भगवान नही हूं। मैं राज बता सकता हूं, अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए शक्ति प्रदान कर भेज सकता हूं।