पटना जिला के उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने उपभोक्ताओं के हित में दो महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं। फ्लैट खरीदने के बाद समझौते में तय सुविधाएं नहीं देने पर बिल्डर को 11.25 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। वहीं, वाहन दुर्घटना के बाद बीमा दावा खारिज करने के मामले में बीमा कंपनी को मरम्मत खर्च के साथ ब्याज, मानसिक उत्पीड़न का मुआवजा और मुकदमे का खर्च देने का निर्देश दिया गया है। दोनों मामलों में आयोग ने सेवा में कमी के आधार पर उपभोक्ताओं को राहत दी। यह आदेश आयोग के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्र और सदस्य रजनीश कुमार ने पारित किए।
फ्लैट में लिफ्ट, जनरेटर और अग्निशमन उपकरण नहीं देने पर कार्रवाई
उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सजल कुमार शर्मा बनाम आर.डी. इको डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य मामले में आयोग ने आठ अक्तूबर को फैसला सुनाया। शिकायतकर्ता का आरोप था कि फ्लैट का कब्जा देने के बावजूद बिल्डर ने बिक्री समझौते में शामिल लिफ्ट, जनरेटर, अग्निशमन उपकरण और अतिरिक्त विद्युत बिंदु जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराईं। इसके कारण उन्हें इन सुविधाओं की व्यवस्था अपने खर्च पर करनी पड़ी। मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और बिक्री समझौते के आधार पर आयोग ने शिकायत स्वीकार कर विपक्षी पक्षों को कुल 11.25 लाख रुपये देने का निर्देश दिया। इसमें 10 लाख रुपये मुआवजा, मानसिक पीड़ा एवं शारीरिक उत्पीड़न के लिए एक लाख रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 25 हजार रुपये शामिल हैं। आयोग ने आदेश दिया कि बिल्डर को आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से 120 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। तय समय में भुगतान नहीं करने पर इसके बाद 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
बीमा कंपनी को 85,092 रुपये मरम्मत खर्च लौटाने का आदेश
वहीं दूसरे मामले में उपभोक्ता शिकायत संख्या 320/2019 में जूही कुमारी बनाम रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की शिकायत पर आयोग ने 29 सितंबर 2026 को निर्णय सुनाया। शिकायतकर्ता की महिंद्रा स्कॉर्पियो एस6 प्लस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। वाहन की मरम्मत पर 85,092 रुपये खर्च हुए थे। शिकायतकर्ता ने बीमा कंपनी के समक्ष दावा किया, लेकिन कंपनी ने नो क्लेम बोनस (एनसीबी) से संबंधित कथित गलत जानकारी का हवाला देते हुए 31 मई 2019 को दावा खारिज कर दिया था। आयोग ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद दावा अस्वीकार करने के आधार को स्वीकार नहीं किया।
12 प्रतिशत ब्याज के साथ मानसिक उत्पीड़न का भी मुआवजा
आयोग ने भारतीय मोटर टैरिफ के प्रावधान जीआर-27 का उल्लेख करते हुए कहा कि नए बीमाकर्ता की ओर से नो क्लेम बोनस दिए जाने की स्थिति में पूर्व बीमाकर्ता से निर्धारित 21 दिनों के भीतर उसका सत्यापन किया जाना चाहिए। इस मामले में निर्धारित अवधि में सत्यापन नहीं किया गया था। आयोग ने बीमा कंपनी के दावा खारिज करने संबंधी पत्र को निरस्त करते हुए शिकायत आंशिक रूप से स्वीकार की। कंपनी को वाहन की मरम्मत के लिए 85,092 रुपये देने होंगे। इसके अलावा 31 मई 2019 से वास्तविक भुगतान तक 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक पीड़ा एवं उत्पीड़न के लिए 20 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये का भुगतान करना होगा। आदेश के मुताबिक, बीमा कंपनी को आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर इसका अनुपालन करना होगा।
उपभोक्ताओं के अधिकारों पर आयोग का जोर
दोनों फैसलों में आयोग ने उपभोक्ताओं के प्रति तय दायित्वों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। आदेशों के जरिए स्पष्ट किया गया कि समझौते के अनुसार, सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने या बीमा दावे को अनुचित आधार पर खारिज करने जैसे मामलों में संबंधित पक्षों को मुआवजा और अन्य देय राशि का भुगतान करना पड़ सकता है।