केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी
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बिहार के विधायक अनंत सिंह उर्फ छोटे सरकार के कथित बयान पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने प्रतिक्रिया दी है। अनंत सिंह ने कथित तौर पर कहा था कि उन्होंने नीतीश कुमार के कहने पर कई हत्याएं की थीं। इस बयान पर मांझी ने कहा कि किसी का साथ देने के लिए गलत काम करना उचित नहीं है। साथ देना है तो अच्छे काम करके देना चाहिए, न कि गलत काम करके। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने और दोष के आधार पर उचित कार्रवाई करने की मांग की। हालांकि, मांझी ने इस बयान से एमएलसी चुनाव में जदयू और एनडीए के उम्मीदवारों को नुकसान होने की आशंका को खारिज करते हुए दावा किया कि एनडीए उम्मीदवार की जीत तय है।
गलत काम को सही नहीं ठहराया जा सकता: मांझी
जीतन राम मांझी ने कहा कि किसी व्यक्ति का साथ देने के नाम पर गलत काम करने की बात सामने आती है तो उसकी समुचित जांच-पड़ताल होनी चाहिए। जांच के बाद उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी गलत काम को सही नहीं ठहराया जा सकता। मांझी के मुताबिक, किसी का समर्थन करना है तो अच्छे कामों के जरिए करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अनंत सिंह के इस कथित बयान का एमएलसी चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा और एनडीए उम्मीदवार की जीत होगी।
रामलीला से समाज को मर्यादा और भाईचारे का संदेश
गयाजी शहर में आयोजित श्रीरामलीला के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भगवान राम के आदर्शों को मौजूदा समय में अपनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि रामलीला का आयोजन वर्षों से होता आ रहा है और यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें इसके उद्घाटन समारोह में शामिल होने का अवसर मिला। मांझी ने कहा कि भगवान राम का चरित्र ऐसा है, जिससे आज भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है। कलियुग में राम का नाम और उनके आदर्श लोगों के लिए मार्गदर्शक हैं। रामायण में भाई-भाई के रिश्ते, मित्रता, महिलाओं के प्रति व्यवहार, समाज के कमजोर वर्गों के साथ आचरण और राजधर्म जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि रामलीला के माध्यम से जब लोग इन प्रसंगों को देखेंगे और समझेंगे तो उन्हें अपने जीवन में भी इन आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। मांझी ने उम्मीद जताई कि गयावासी भगवान राम के आदर्शों को आत्मसात करेंगे और समाज में मर्यादा, भाईचारे और सद्भाव को मजबूत बनाएंगे।
भरत के त्याग से मिलती है रिश्तों और मर्यादा की सीख
भगवान राम के वनवास का प्रसंग सुनाते हुए मांझी ने भरत के त्याग और अपने भाई के प्रति समर्पण का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि भगवान राम के वनवास जाने के बाद भरत चाहते तो राजगद्दी संभाल सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। भरत ने भगवान राम की खड़ाऊं को सम्मान देकर उनके प्रति अपनी निष्ठा दिखाई। मांझी ने कहा कि यह प्रसंग सिखाता है कि सत्ता से अधिक महत्वपूर्ण रिश्ते, त्याग और मर्यादा हैं। आज के समाज को भी भगवान राम के इन्हीं आदर्शों को अपनाने की जरूरत है।