बिहार के गया जिले से एक हैरान करने वाला मामला प्रकाश में आया है। मौत होने के बाद भी चार माह तक सरकारी दफ्तर से पेंशन मृतका के खाते में पेंशन भेजता रहा। जब सरकारी दफ्तर के संबंधित पदाधिकारी को पता चला तो आननफानन में कार्रवाई शुरू हुई है। हालांकि मृतका की मौत की खबर पोते ने लिखित आवेदन देकर सूचना दी थी। यह पूरा मामला गया नगर निगम की है।
गया नगर निगम उनके खाते में पैसा भेजता रहा
गया नगर निगम के आए दिन किसी न किसी मामले में सुर्खियों में रहता है। ऐसा कोई पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व रिटायर्ड होने के बाद चार वर्षों तक अधिक नौकरी करने का मामला उजागर हुआ था। मिली जानकारी के मुताबिक, गया नगर निगम में पदस्थापित महाराज सिंह की मौत हो गई थी। महराज सिंह के मौत के बाद उनकी पत्नी माधुरी देवी को पारिवारिक पेंशन मिल रहा था। माधुरी देवी को पारिवारिक पेंशन के तौर पर प्रत्येक माह उनके खाते में 11 हजार 265 रुपए भेजा जा रहा था। उनकी मौत के चार माह तक गया नगर निगम उनके खाते में पैसा भेजता रहा।
पारिवारिक पेंशन मृतिका के खाते में जाता रहा
सूत्रों की मानें तो कि पारिवारिक पेंशन पाने वाली माधुरी देवी की मौत 10 मई को हो गई थी। मरने वाले के परिवार की ओर से गया नगर निगम को 24 जून को सूचना लिखित रूप से दिया गया था। मौत की सूचना मृतिका के पोता गौतम कुमार ने दी थी। उसके बावजूद मई, जून, जुलाई और अगस्त तक पारिवारिक पेंशन मृतिका के खाते में जाता रहा। जब पेंशन का पैसा आना बंद नहीं हुआ तो इसकी जानकारी उप नगर आयुक्त स्थापना को दी गई। उसके बाद जांच शुरू हुई, तब जाकर सितंबर माह से पेंशन का पैसा भेजना बंद किया गया। इस संबंध में उप नगर आयुक्त शिवनाथ ठाकुर ने बताया कि उक्त मामले में स्थापना शाखा के प्रभारी और अन्य लोग जिम्मेदार है। सभी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करते हुए स्पष्टीकरण की मांग की गई है। स्पष्टीकरण का जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।